
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या राजकीय मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।
डिप्टी सीएम के निर्देश पर होगी विस्तृत जांच
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा को पूरे मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि अवकाश पर रहने के दौरान सरकारी वित्तीय निर्णय किस आधार पर लिए गए और क्या संबंधित नियमों का पालन किया गया।
अवकाश के दौरान खरीद मंजूरी और भुगतान का आरोप
डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर आरोप है कि बीमारी के कारण अवकाश पर रहने के बावजूद उन्होंने गवर्नमेंट ईमार्केटप्लेस पोर्टल पर सरकारी खरीद से जुड़े अनुबंधों को मंजूरी दी और करोड़ों रुपये के भुगतान संबंधी चेकों पर हस्ताक्षर किए। आरोप है कि अवकाश पर जाने से पहले उन्होंने अपने पद का कार्यभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया था, लेकिन इसके बावजूद वित्तीय अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखा।
2.12 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च का आरोप
शिकायत के मुताबिक, जनवरी 2023 में अवकाश के दौरान सात और 10 जनवरी को करीब 84 लाख रुपये के जीईएम अनुबंधों को स्वीकृति दी गई। वहीं, आठ से 10 जनवरी के बीच 17 चेकों के जरिए करीब 1.29 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह अवकाश अवधि में कुल 2.12 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन के व्यय का आरोप लगाया गया है।
कार्यवाहक प्राचार्य ने की थी शिकायत
यह शिकायत तत्कालीन कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सत्यजीत वर्मा ने उपमुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अवकाश के दौरान वित्तीय अधिकारों का प्रयोग नियमों के विपरीत किया गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, विस्तृत जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ विभागीय एवं अन्य नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।