
लखनऊ,अमृत विचार : केजीएमयू प्रशासन पर करोड़ों रुपये के टेंडर नवीनीकरण को लेकर लगे आरोपों का विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद पर सेवा अनुबंध समाप्त होने के बाद, बिना नया टेंडर निकाले उसी संस्था के पक्ष में अनुबंध का नवीनीकरण करने के आरोप लगे हैं।
मामले को लेकर शासन के पत्र और विधान परिषद सदस्य शैलेंद्र प्रताप सिंह के राज्यपाल को भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा 8 मई 2026 को संबन्धित प्रकरण का संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। पत्र में आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा गया है कि यदि टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद बिना नई निविदा के नवीनीकरण किया गया है तो इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
इसी प्रकरण को आधार बनाते हुए एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने राज्यपाल को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि वर्तमान कुलपति ने सार्वजनिक खरीद के मूल सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए करोड़ों रुपये के अनुबंध का नियमों के विपरीत विस्तार किया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। पैथोलॉजिकल सेवाएं प्रदान कर रही पीओसीटी सर्विसेज और ट्रामा सेंटर में सीटी स्कैन मशीन संचालक आमा मेडिकल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर का नवीनीकरण किए जाने के मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे वित्तीय पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और सुशासन के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
एमएलसी ने मामले की जांच राज्य सतर्कता विभाग, एसआईटी अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अनुबंध से जुड़े सभी अभिलेख सुरक्षित रखने और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका नियम विरुद्ध पाई जाए तो उसके खिलाफ विभागीय, वित्तीय और दंडात्मक कार्रवाई करने की भी मांग की है।