रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चाय पत्ती और दाल जैसी बुनियादी चीजें जल्द ही आम आदमी की जेब पर थोड़ा और भारी पड़ सकती हैं। टाटा चाय और टाटा नमक जैसे लोकप्रिय ब्रांडों का निर्माण करने वाली प्रमुख एफएमसीजी कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि कच्चे माल की लागत में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है, तो कंपनी को विवश होकर इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का एक हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है। कंपनी का यह कदम मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और प्रतिकूल मौसम के कारण पैदा हुए हालातों से जुड़ा हुआ है, जो खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और उत्पादन लागत को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुनील डी’सूजा के अनुसार, मौजूदा बाजार परिस्थितियों में अपने मुनाफे के स्तर को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने के लिए कीमतों में समायोजन करना आवश्यक हो सकता है। आर्थिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स चालू वित्त वर्ष के दौरान अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को 50 से 70 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ाने के अपने तयशुदा लक्ष्य पर पूरी तरह कायम है। हालांकि, भूराजनीतिक उथलपुथल, विशेष तौर पर पश्चिम एशिया में बने तनाव के माहौल और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अल नीनो प्रभाव ने कच्चे माल की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव पैदा कर दिया है, जिससे कंपनियों के लिए लागत प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कच्चे माल की कीमतों में इस दबाव का सबसे ज्यादा असर चाय और दाल जैसे प्रमुख सेगमेंट पर पड़ता दिखाई दे रहा है। मानसून के आगमन में हुई देरी और अनियमितता के कारण चाय पत्ती की उत्पादन लागत में पहले ही 7 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंपनी ने हाल ही में चाय के दामों में आंशिक बढ़ोतरी की है और बाजार के अगले 15 से 30 दिनों के रुख पर पैनी नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही, यदि अल नीनो के प्रभाव के चलते आने वाले दिनों में दालों की फसल को नुकसान पहुंचता है या उत्पादन प्रभावित होता है, तो कंपनी अपने ब्रांडेड दाल सेगमेंट यानी ‘टाटा संपन्न’ के उत्पादों के दाम भी बढ़ाने पर विचार कर सकती है।
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वित्तीय मोर्चे पर एक मिलाजुला लेकिन मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। समीक्षाधीन अवधि के दौरान कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर 5,348.88 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 28 प्रतिशत की शानदार छलांग के साथ 444.86 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि, इन मजबूत आंकड़ों के बीच भी भारतीय बाजार में कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों के कारण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव साफ तौर पर महसूस किया गया है।
विभिन्न व्यावसायिक सेगमेंट के प्रदर्शन पर नजर डालें तो दालों और मसालों का लोकप्रिय ब्रांड ‘टाटा संपन्न’ इस तिमाही में सबसे आगे रहा, जिसकी बिक्री में 58 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखने को मिला। इसके अलावा, रेडीटूड्रिंक कोल्ड ड्रिंक्स और बेवरेजेस सेगमेंट की बिक्री में 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, टाटा स्टारबक्स की कमाई में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और भारतभर में इसके कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 498 हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक और मौसमी अनिश्चितताओं के बीच कंपनियों के लिए अपने मुनाफे को बचाए रखना एक कठिन कार्य है, और टाटा कंज्यूमर का यह संभावित मूल्य वृद्धि का निर्णय आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।