
डिजिटल डेस्क दिल्ली के जंतरमंतर पर NEETUG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान कई चेहरे चर्चा में रहे। इसी में से एक नाम मोहम्मद जुनैद का भी रहा। आंदोलन के दौरान वह अपने साथियों के साथ प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, ब्रेडपकौड़ा और अन्य खाद्य सामग्री की व्यवस्था करते दिखाई दिए।
बाद में जुनैद ने आरोप लगाया कि आंदोलन में मदद करने की वजह से उनके परिवार को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए नजर आ रही है। पुलिस ने कहा कि परिवार के सदस्यों को केवल सामान्य पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
कौन हैं मोहम्मद जुनैद?
मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव के निवासी हैं। उनके पिता खेतीकिसानी करते हैं और परिवार में कुल आठ भाईबहन हैं।
जुनैद ने गाजियाबाद के सुंदरप कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। वह खुद को अधिवक्ता बताते हैं और न्यायिक सेवा परीक्षा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
कैसे जुड़े छात्र आंदोलन से?
जुनैद के अनुसार, वह 6 जून को पहली बार जंतरमंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि 20 जून को एक प्रतियोगी परीक्षा देने के बाद जब वह प्रदर्शन स्थल पहुंचे तो वहां भीषण गर्मी में छात्रों के लिए पानी और खाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
इसके बाद उन्होंने स्वयं पानी उपलब्ध कराने की शुरुआत की। धीरेधीरे अन्य लोग भी उनके साथ जुड़ते गए और प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जाने लगीं। उन्होंने बताया कि इस कार्य में बृजेश पांडे ने भी सहयोग किया।
परिवार को लेकर क्या लगाए आरोप?
एक मीडिया इंटरव्यू में जुनैद ने दावा किया कि 23 जुलाई को गाजियाबाद के मसूरी थाने की पुलिस उनके पिता को घर से पूछताछ के लिए ले गई और देर रात छोड़ा। उनका आरोप है कि अगले दिन फिर उनके पिता को थाने बुलाया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मेरठ में रहने वाली उनकी बहन के ससुर और देवर को भी पुलिस गाजियाबाद लेकर गई थी। साथ ही आरोप लगाया कि परिवार के कुछ दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड और पासबुक, पुलिस ने अपने कब्जे में लिए थे।
जुनैद का कहना है कि पुलिस ने उनसे कहा था कि यदि वह स्वयं थाने पहुंच जाएंगे तो परिवार के लोगों को छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
पुलिस का क्या है पक्ष?
गाजियाबाद के डीसीपी ग्रामीण जोन सुरेंद्रनाथ तिवारी ने इन आरोपों पर कहा कि जुनैद के पिता को केवल सामान्य पूछताछ के लिए मसूरी थाने बुलाया गया था। पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, जुनैद के पिता मुस्तफा ने भी एक वीडियो में कहा कि उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था और बाद में वापस घर भेज दिया गया।
CJP ने किया समर्थन
मामला सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मोहम्मद जुनैद का समर्थन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस उनके वालंटियर और परिवार को परेशान कर रही है।
पार्टी ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की गैरकानूनी कार्रवाई हुई तो मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी।
हिरासत में लेने का भी लगाया दावा
जुनैद ने एक अन्य मीडिया इंटरव्यू में दावा किया कि 24 जुलाई की रात कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल से लौटते समय दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और करीब 17 से 18 घंटे तक अपने पास रखा। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान उन्होंने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी।
विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन
जुनैद के आरोप सामने आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में पोस्ट किए। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि छात्रों की मदद करने वाले व्यक्ति को परेशान करना उचित नहीं है और सरकार से इस तरह की कार्रवाई रोकने की अपील की। इसके अलावा कई अन्य नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी।