Hardoi News: शाहाबाद सीएचसी में फिर सक्रिय हुए प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारी? प्रसूताओं को निजी अस्पताल भेजने के आरोपों से उठे सवाल

Hardoi News: शाहाबाद सीएचसी में फिर सक्रिय हुए प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारी? प्रसूताओं को निजी अस्पताल भेजने के आरोपों से उठे सवाल
Hardoi News: शाहाबाद सीएचसी में फिर सक्रिय हुए प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारी? प्रसूताओं को निजी अस्पताल भेजने के आरोपों से उठे सवाल

हरदोई: जिले के शाहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बार फिर निजी अस्पतालों के कर्मचारियों की सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल परिसर में प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारी खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं और प्रसूता महिलाओं के परिजनों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रेरित करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जाता है कि कुछ समय पहले भी रात्रि के दौरान प्रसूता महिलाओं को कथित रूप से कमीशनखोरी के चलते निजी अस्पतालों में भेजे जाने का मामला चर्चा में आया था। उस समय मीडिया में खबरें सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्यकर्मियों पर निगरानी बढ़ाई थी और निजी अस्पतालों के कर्मचारियों की अस्पताल परिसर में आवाजाही पर भी रोक जैसी स्थिति बन गई थी।

लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले लगभग एक महीने से सुबह और शाम के समय निजी अस्पतालों से जुड़े कर्मचारी फिर से अस्पताल परिसर में दिखाई देने लगे हैं। आरोप है कि ये लोग डिलीवरी वार्ड के आसपास भी पहुंचते हैं और प्रसूताओं के परिजनों से संपर्क कर उन्हें निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए राजी करने का प्रयास करते हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ मामलों में अस्पताल के बाहर वाहन बुलाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाया जाता है, जहां इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण की शिकायतें सामने आती हैं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आरोपों में कुछ आशा कार्यकर्ताओं और अस्पताल कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का भी जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

शिकायतों के बावजूद अस्पताल परिसर में निजी अस्पतालों के कर्मचारियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक नहीं लग पाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस दिशा में सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों का भरोसा बना रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *