
नई दिल्ली: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल पर लगाम कसने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश कर दिया है। यह संशोधन 2024 में लागू किए गए केंद्रीय कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सामने आए परीक्षा विवादों ने यह स्पष्ट किया कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच, मुकदमे और सजा की प्रक्रिया भी तेज और अधिक कठोर होनी चाहिए।
2024 का कानून क्यों पर्याप्त नहीं माना गया?
साल 2024 में केंद्र सरकार ने पहली बार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर का कानून लागू किया था। यह कानून UPSC, SSC, NTA, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS और केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू हुआ।
हालांकि, इसके बाद भी कई परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए। सरकार का मानना है कि अपराधी नेटवर्क तकनीक और संगठित तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस हुई।
नया संशोधन क्यों लाया गया?
सरकार के अनुसार, पेपर लीक अब व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। हालिया परीक्षा विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग तेज हुई। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसी क्रम में संशोधन विधेयक लाया गया है, जिसमें कठोर दंड के साथ तेज जांच और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।
पुराने और नए कानून में क्या बड़ा बदलाव होगा?
संशोधन विधेयक के तहत सबसे बड़ा बदलाव सजा, जुर्माने और मुकदमे की समयसीमा को लेकर प्रस्तावित किया गया है।
गंभीर मामलों में जुर्माने की सीमा बढ़ाकर ₹10 करोड़ तक करने का प्रस्ताव।
संगठित अपराधों के खिलाफ अधिक कठोर दंड का प्रावधान।
जांच प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की योजना।
विशेष जांच तंत्र के गठन का प्रस्ताव।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई।
लगभग 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य।
विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति और अपीलों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था।
अब केवल पेपर लीक करने वाला ही नहीं, पूरा नेटवर्क होगा जिम्मेदार
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि किसी परीक्षा एजेंसी, आईटी सेवा प्रदाता, डेटा मैनेजमेंट कंपनी, परीक्षा केंद्र संचालक या संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। यानी जवाबदेही केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी।
किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून?
संशोधित कानून निम्न प्रमुख परीक्षाओं पर लागू रहेगा—
NEET
JEE
CUET
UGCNET
UPSC
SSC
रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षाएं
IBPS और अन्य केंद्र सरकार की अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाएं
सरकार परीक्षा प्रणाली में और क्या बदलाव चाहती है?
सरकार केवल दंडात्मक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहती। परीक्षा संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर भी काम किया जा रहा है।
इनमें शामिल हैं—
NTA में संस्थागत सुधार
साइबर सुरक्षा को मजबूत करना
डिजिटल फॉरेंसिक तंत्र विकसित करना
परीक्षा केंद्रों की बेहतर निगरानी
विशेषज्ञों की नियुक्ति
अधिक परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित प्रणाली में लाना
क्या केवल सख्त कानून से पेपर लीक रुक जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि कठोर कानून एक मजबूत कदम है, लेकिन केवल सजा बढ़ाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र, परीक्षा केंद्रों का नियमित ऑडिट और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी होगी।
क्या है नई सजा का मापदंड?
सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।
सामान्य मामलों में सजा 35 वर्ष से बढ़ाकर 510 वर्ष तक करने का प्रस्ताव।
अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक।
परीक्षा सेवा प्रदाताओं पर जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक।
दोषी सेवा प्रदाताओं पर परीक्षा संचालन प्रतिबंध 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष।
संगठित पेपर लीक गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना प्रस्तावित।
ऐसे मामलों में 7 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान।
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
अब आगे क्या होगा?
संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया जा चुका है। अब इस पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा होगी। यदि विधेयक पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर लेता है, तो संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा।