
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अंबेडकरनगर के वर्ष 1990 के चर्चित आपराधिक मामले में दोषसिद्ध पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनकी सजा स्थगित करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब पक्षकार आपराधिक अपील के अंतिम निस्तारण पर बहस के लिए तैयार हैं, तो केवल सजा स्थगन आवेदन के आधार पर सुनवाई को टाला नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने सुनवाई टालने की मांग को माना अनुचित
यह आदेश न्यायमूर्ति आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आरएमएन मिश्रा की खंडपीठ ने पवन कुमार पांडेय की ओर से दाखिल अपील में सजा निलंबन की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में अपीलों का जल्द से जल्द अंतिम निस्तारण होना चाहिए। यदि अपील और उससे जुड़े पुनरीक्षण मामले पर सुनवाई संभव है, तो सजा स्थगन आवेदन को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
अनावश्यक देरी की रणनीति स्वीकार नहीं होगी
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अपील की सुनवाई में अनावश्यक देरी करने की रणनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने सजा स्थगन की अर्जी को खारिज करते हुए आपराधिक अपील और संबंधित पुनरीक्षण के अंतिम निस्तारण के लिए 19 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।
1990 के मामले में दोषसिद्ध हैं पवन पांडेय
पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय अंबेडकरनगर के वर्ष 1990 के चर्चित आपराधिक मामले में दोषसिद्ध हैं। उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आवेदन दाखिल किया था, जिसे अदालत ने अब खारिज कर दिया है।