
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ‘जन्म और मृत्यु का पंजीकरण विधेयक, 2026’ लोकसभा में पेश किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया।
लोकसभा में उस समय विपक्ष प्रश्नपत्र लीक से जुड़े लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहा था। संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक सदन में पेश कर दिया गया।
देरी से पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त
यह संशोधन जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बदलाव का प्रस्ताव करता है। सरकार का उद्देश्य एक वर्ष से अधिक देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाना है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत एक वर्ष से अधिक देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट , उपमंडल मजिस्ट्रेट या किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है। नए विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दोस्तरीय मंजूरी प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, विलंब से होने वाले प्रत्येक पंजीकरण से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा विस्तृत सत्यापन किया जाएगा ताकि फर्जी पंजीकरण की संभावना कम हो सके।
इसके अलावा, देर से पंजीकरण कराने पर निर्धारित शुल्क भी देना होगा। हालांकि शुल्क की राशि अधिनियम के तहत बनाए जाने वाले नियमों के माध्यम से बाद में अधिसूचित की जाएगी।
डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेंगे रिकॉर्ड
सरकार देशभर के जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार कर रही है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस डेटाबेस को आधार कार्ड, मतदाता सूची, राशन कार्ड और पासपोर्ट जैसे सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ने की योजना है।
इसके बाद नागरिकों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा भी मिलेगी।
जन्म प्रमाण पत्र बनेगा अहम दस्तावेज
सरकार के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति का पहला कानूनी पहचान दस्तावेज होता है। इसका उपयोग स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरियों, पासपोर्ट, आधार कार्ड, मतदान अधिकार और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।
इसी तरह मृत्यु प्रमाण पत्र विरासत, बीमा दावे, पेंशन, संपत्ति हस्तांतरण, बैंक खातों के निस्तारण और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने जैसे कार्यों के लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेज है।