इथेनॉल बवाल के बीच 5 प्वॉइंट्स में समझिए पेट्रोल भरवाते समय कैसे होता है फ्रॉड?

इथेनॉल बवाल के बीच 5 प्वॉइंट्स में समझिए पेट्रोल भरवाते समय कैसे होता है फ्रॉड?

अगर आपकी गाड़ी अचानक कम माइलेज देने लगे, इंजन झटके खाने लगे या स्टार्ट होने में दिक्कत आने लगे, तो इसकी वजह सिर्फ वाहन की खराबी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल की गुणवत्ता भी हो सकती है. भारत में पेट्रोल पंपों पर मिलावटी ईंधन और कम मात्रा में पेट्रोल देने की शिकायतें समयसमय पर सामने आती रही हैं. हालांकि तेल कंपनियां और सरकार लगातार निगरानी करती हैं, लेकिन ग्राहकों के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है. अभी इथेनॉल के भरवाने के बाद भी कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनकी गाड़ी खराब हो रही है. ऐसे में पेट्रोल भरवाते समय कुछ छोटीछोटी बातों का ध्यान रखकर आप नुकसान से बच सकते हैं.

इथेनॉल बवाल के बीच 5 प्वॉइंट्स में समझिए पेट्रोल भरवाते समय कैसे होता है फ्रॉड?

अभी जब से सरकार ने E20 की पॉलिसी लाई है. गाड़ियों में 20 प्रतिशत इथेनॉल वाला पेट्रोल भरा जा रहा है. इससे जुड़े तमाम विवाद सोशल मीडिया के जरिए आ रहे हैं. हाल ही में यूट्यूबर मनीष कश्यप ने एक वीडियो बना कर बताया था कि उनकी टोयोटा की एक नई गाड़ी इथेनॉल वाला पेट्रोल डालने की वजह से खराब हो गई है, जिसके बाद कंपनी का बयान आया. जिसमें कहा गया कि उनकी गाड़ी E20 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई कार है. इसलिए उसमें खामी नहीं आ सकती है. गाड़ी पेट्रोल में गड़बड़झाले की वजह से खराब हो सकती है…इसी के बाद से ही खराब, दूषित और मिलावटी पेट्रोल को लेकर बातचीत शुरू हो गई है. आइए इस खबर में आपको डिटेल में बताते हैं कि पेट्रोल किनकिन स्थितियों में खराब हो जाता है और इससे बचने के लिए आपको किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही पेट्रोल से जुड़े और कौनकौन से फ्रॉड हैं, जिनसे आपको सावधान रहना है.

1. कैरोसिन की मिलावट

पेट्रोल में सबसे ज्यादा केरोसिन मिलाने के मामले सामने आते हैं. केरोसिन पेट्रोल की तुलना में सस्ता होता है, इसलिए कुछ लोग ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसकी मिलावट कर देते हैं. इससे इंजन में कार्बन जमा होने लगता है, स्पार्क प्लग खराब हो सकते हैं और प्रदूषण भी बढ़ता है.

2. नाफ्था की भी होती है मिलावट

इसके अलावा नाफ्था के भी पेट्रोल में मिलाए जाने की खबरें आती हैं. यह पेट्रोलियम उत्पाद है, जो देखने में पेट्रोल जैसा लगता है लेकिन काफी सस्ता होता है. इसकी मिलावट से इंजन में नॉकिंग की समस्या होती है और इंजन के अंदरूनी हिस्सों पर तेजी से घिसाव बढ़ता है. कुछ मामलों में सॉल्वेंट, थिनर या इंडस्ट्रियल अल्कोहल जैसी चीजें भी पेट्रोल में मिला दी जाती हैं. इससे ईंधन की मात्रा तो बढ़ जाती है, लेकिन यह फ्यूल इंजेक्टर और इंजन के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

3. पानी की मिलावट सबसे खतरनाक

कभीकभी पेट्रोल का भंडारण और परिवहन ठीक से न होने के कारण वह दूषित हो जाता है. पानी का पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड टैंकों में यदि लीकेज हो या टैंक पुराने हों, तो बारिश का पानी या जमीन के नीचे की नमी पेट्रोल में मिल सकती है. यह खास तौर पर E20 के मामले में अधिक खतरनाक है क्योंकि एथेनॉल नमी को बहुत तेजी से सोखता है. इसके अलावा पुराने स्टोरेज टैंकों में जंग लगने या गंदगी जमा होने के कारण ईंधन में बारीक कण मिल जाते हैं, जो इंजन के फिल्टर को क्लॉग कर सकते हैं.

4. कम मात्रा में पेट्रोल देना भी बड़ा फ्रॉड

पेट्रोल पंपों पर सिर्फ मिलावट ही नहीं, बल्कि शॉर्ट डिलीवरी भी एक आम शिकायत है. इसमें मशीन पर जितना पेट्रोल या जितनी रकम दिखाई जाती है, वास्तविक रूप से उससे कम ईंधन वाहन में जाता है. कई बार ग्राहक जल्दबाजी में मीटर पर ध्यान नहीं देते और नुकसान उठा लेते हैं. एक और तरीका जीरो रीडिंग नहीं दिखाना है. कई बार कर्मचारी पिछले ग्राहक की रीडिंग से ही मशीन चलाना शुरू कर देता है. अगर ग्राहक मीटर की शुरुआती रीडिंग नहीं देखता, तो उसे कम पेट्रोल मिल सकता है. इसलिए हमेशा यह सुनिश्चित करें कि मीटर 0.00 से शुरू हो रहा है.

5. ऐसे करें पेट्रोल की गुणवत्ता की जांच

फिल्टर पेपर टेस्टसाफ सफेद फिल्टर पेपर या सफेद कागज पर पेट्रोल की कुछ बूंदें डालें. शुद्ध पेट्रोल पूरी तरह उड़ जाता है और कोई दाग नहीं छोड़ता. अगर कागज पर तैलीय निशान या दाग रह जाए, तो उसमें केरोसिन या अन्य भारी पदार्थों की मिलावट हो सकती है.

डेंसिटी टेस्ट सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की डेंसिटी प्रदर्शित करना अनिवार्य है. पेट्रोल की डेंसिटी सामान्यत 720 से 775 किलोग्राम प्रति घन मीटर के बीच होनी चाहिए. इससे काफी अलग डेंसिटी मिलावट का संकेत हो सकती है.

रंग और गंध शुद्ध पेट्रोल आमतौर पर पारदर्शी या हल्के पीले रंग का होता है और इसकी एक अलग गंध होती है. अगर पेट्रोल धुंधला दिखाई दे या उसमें सॉल्वेंट जैसी तेज गंध आए, तो उसकी गुणवत्ता पर संदेह किया जा सकता है.

पेट्रोल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • हमेशा मीटर पर 0.00 देखने के बाद ही पेट्रोल भरवाएं.
  • भरोसेमंद और अधिकृत पेट्रोल पंप से ही ईंधन लें.
  • हर बार पेट्रोल भरवाने के बाद बिल जरूर लें.
  • मिलावट की आशंका होने पर फिल्टर पेपर टेस्ट कराने के लिए कहें.
  • अगर गाड़ी में अचानक माइलेज कम हो जाए, इंजन झटके खाने लगे या काला धुआं निकलने लगे, तो ईंधन की गुणवत्ता की जांच जरूर कराएं.

पेट्रोल में मिलावट पर सरकार का बयान

अभी विवाद के बाद तेल की गुणवत्ता पर सवाल नए सिरे से उठना शुरू हुए हैं. मगर इससे पहले भी सरकार मान चुकी है कि तेल में काफी मात्रा में मिलावट होती है. संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने 2016 में बताया था कि देशभर में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोलडीजल में मिलावट और कम मात्रा में ईंधन देने के मामले सामने आए थे. सरकारी तेल कंपनियों की जांच में पिछले तीन वर्षों और अप्रैल से दिसंबर 2015 के दौरान कम माप के 4,240 मामले और मिलावट के 217 मामले दर्ज किए गए. सरकार के अनुसार, गंभीर अनियमितताओं के चलते 172 पेट्रोल पंपों की डीलरशिप रद्द की गई. इसके अलावा National Green Tribunal के निर्देश पर दिल्लीएनसीआर सहित कई क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाए गए, जिनमें नाफ्था और केरोसिन की मिलावट की भी जांच हुई.

सरकार ने यह भी बताया था कि पेट्रोल पंपों पर नियमित और औचक निरीक्षण किए जाते हैं. धोखाधड़ी रोकने के लिए पेट्रोल पंपों का ऑटोमेशन, ईंधन टैंकरों की GPS से निगरानी, थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन और गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस रद्द करने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं. उस अवधि में देशभर में 6.68 लाख से अधिक निरीक्षण किए गए थे. हालांकि, यहां ध्यान देने की बात यह होगी कि यह डेटा पेट्रोल और डीजल की मिलावट से जुड़ा हुआ है. चूंकि सरकार का आधिकारिक बयान साल 2016 का है तो उस समय देश में एथेनॉल पॉलिसी भी नहीं थी. कुल मिलाकर, पेट्रोल पंपों पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है. यदि ग्राहक मीटर की शुरुआती रीडिंग देखें, बिल लें, जरूरत पड़ने पर गुणवत्ता परीक्षण की मांग करें और केवल भरोसेमंद पेट्रोल पंपों से ईंधन भरवाएं, तो मिलावट और कम मात्रा जैसे फ्रॉड का शिकार होने की संभावना काफी कम हो सकती है.

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