बारबार खून की कमी होना हो सकता है थैलेसीमिया का संकेत, समय रहते करें पहचान

बारबार खून की कमी होना हो सकता है थैलेसीमिया का संकेत, समय रहते करें पहचान

कई लोगों में बारबार खून की कमी देखने को मिलती है. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें से एक थैलेसीमिया भी है. थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है, जो मातापिता से बच्चों में पहुंच सकती है. इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है. इस बीमारी में शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिससे एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी हो सकती है. खून की कमी होने पर व्यक्ति को कमजोरी, जल्दी थकान, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. हालांकि, बारबार खून की कमी होना हमेशा थैलेसीमिया की वजह से ही नहीं होता. इसके पीछे आयरन, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, लंबे समय तक खून बहना या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं.

बारबार खून की कमी होना हो सकता है थैलेसीमिया का संकेत, समय रहते करें पहचान

यही वजह है कि बारबार खून की कमी होने पर उसकी सही वजह पता करना जरूरी होता है. अगर समय रहते जांच न कराई जाए, तो जैसे जेनेटिक बीमारी की पहचान होने में देरी हो सकती है. वहीं, अगर समय पर बीमारी का पता चल जाए, तो मरीज का इलाज और देखभाल सही तरीके से की जा सकती है. आइए जानते हैं कि थैलेसीमिया के अन्य लक्षण क्या हैं, किन लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है और डॉक्टर से कब मिलना चाहिए.

थैलेसीमिया के अन्य लक्षण क्या हैं और किन लोगों में इसका ज्यादा खतरा?

के अनुसार, थैलेसीमिया के लक्षण बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करते हैं. कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ में बचपन से ही परेशानी शुरू हो सकती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। थैलेसीमिया होने पर बारबार खून की कमी, जल्दी थकान, कमजोरी, चेहरा पीला पड़ना, सांस फूलना और बच्चों की धीमी बढ़त जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

कुछ मामलों में आंखों या त्वचा का पीला पड़ना और हड्डियों में बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में पहले से थैलेसीमिया या थैलेसीमिया ट्रेट रहा हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है क्योंकि यह एक जेनेटिक बीमारी है और मातापिता से बच्चों में पहुंच सकती है. इसलिए परिवार में इसका इतिहास होने पर समय पर जांच कराना जरूरी माना जाता है.

एनीमिया और थैलेसीमिया में क्या अंतर है?

एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की कमी होना. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे आयरन, विटामिन बी12, या फोलेट की कमी, ज्यादा खून बहना या दूसरी बीमारियां. वहीं, थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, यानी थैलेसीमिया से एनीमिया हो सकता है, लेकिन हर एनीमिया थैलेसीमिया नहीं होता. अगर बारबार खून की कमी हो रही हो और इलाज के बाद भी समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर थैलेसीमिया की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं.

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर बारबार खून की कमी हो रही हो, कमजोरी और थकान लंबे समय तक बनी रहे, चेहरा पीला दिखाई दे, सांस जल्दी फूलने लगे या इलाज के बाद भी हीमोग्लोबिन बारबार कम हो जाए, तो डॉक्टर से जरूर मिलें. इसके अलावा अगर परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास है, तो शादी से पहले या प्रेग्नेंसी की प्लानिंग के समय डॉक्टर की सलाह लेकर थैलेसीमिया की जांच करानी चाहिए.

इससे आगे होने वाले बच्चे में इस बीमारी का खतरा समझने में मदद मिलती है. समय पर जांच और सही इलाज से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है और आगे की देखभाल आसान हो जाती है.

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