मॉनसून की बारिश ने कई जगहों पर तबाही मचाई है. नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में बाढ़ की वजह से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं जबकि पहाड़ों में बारिश के चलते लगातार भूस्खलन की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 22 राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है.

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 34 दिनों में उत्तरपश्चिम और मध्य भारत में मॉनसून सामान्य से अधिक एक्टिव रहेगा. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा और नॉर्थ ईस्ट के कई राज्यों में अलगअलग दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
चार धाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित
लगातार बारिश के कारण भूस्खलन हुआ और गढ़वाल में सड़क संपर्क बाधित हो गया, जिसके चलते चार धाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने भारी बारिश की आशंका को देखते हुए एहतियात के तौर पर तीर्थयात्रा को रोक दिया। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने कहा, “मौसम में सुधार और सभी मार्गों को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यात्रा फिर से शुरू होगी। पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के कारण तीर्थयात्रा मार्गों में बाधा उत्पन्न होने के बाद यह निर्णय लिया गया है।” उन्होंने कहा कि मंगलवार और बुधवार को भी यात्रा स्थगित रहेगी, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
टूटा पुल और 60 हजार लोगों की पुकार… प्रशासन कब जागेगा? कश्मीर में भारी बारिश ने बढ़ाई मुसीबत
JammuKashmir News: जम्मूकश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. कई इलाके अब भी मुख्य सड़कों से कटे हुए हैं, तो कई गांवों में लोगों के घरों तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन कठुआ जिले के बेला इलाके की तस्वीर सबसे ज्यादा भयावह है, जहां एक पुल के पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने से 60 हजार से अधिक आबादी का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है.
पिछले साल बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ पुल
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले साल आई बाढ़ में इस पुल को भारी नुकसान पहुंचा था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद प्रशासन की ओर से स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराया गया. ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने उसे भी बहा दिया. अब लोगों के सामने सिर्फ दो ही विकल्प हैं या तो जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करें या फिर 25 से 30 किलोमीटर लंबा दूसरा रास्ता अपनाएं.
78 मौतों के बाद भी नहीं थमी असम की मुसीबत
असम में बाढ़ से बुधवार को तीन और लोगों की मौत होने से राज्य में इस आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई. एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई. बुलेटिन के मुताबिक, असम के सात जिलों में करीब तीन लाख लोग अब भी बाढ़ की चपेट में हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले तीन दिन तक राज्य के कुछ इलाकों के साथसाथ पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी गरजचमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया है.
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आधिकारिक बुलेटिन में बताया गया कि पिछले 24 घंटे में तीन लोगों के मरने की सूचना है, जिनमें से दो लोग शिवसागर जिले के और एक व्यक्ति गोलाघाट का था. इसके साथ ही बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई. बाढ़ से शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिस्वनाथ और कामरूप शहरी समेत सात जिले अब भी प्रभावित हैं, जहां 551 गांव इसकी चपेट में हैं.
राज्य में बाढ़ से 3,00,031 लोग प्रभावित हैं. चराइदेव सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 1,37,561 लोग बाढ़ की चपेट में हैं. शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित हैं. 28 जुलाई को छह जिलों में 3.32 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे. बाढ़ के कारण विस्थापित 16,500 से अधिक लोगों ने 71 राहत शिविरों में शरण ली है. इसके अलावा, 30 राहत वितरण केंद्र के जरिये 72,000 से अधिक लोगों को मदद दी जा रही है. प्रभावित इलाकों में चिकित्सकों और पशु चिकित्सकों की टीम समेत कई एजेंसियां बचाव कार्यों में जुटी रहीं. बाढ़ के कारण 21,523.08 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र जलमग्न है। 11,000 से अधिक मवेशी बह गए, जबकि 17,000 अन्य प्रभावित हुए।