भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है. देश की बड़ी युवा आबादी आज तकनीक, इंटरनेट और नए रोजगार के अवसरों के साथ आगे बढ़ रही है. एक तरफ जहां युवा तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजगार की चुनौती भी बनी हुई है. सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, देश में बेरोजगारी दर में कुछ कमी आई है. वहीं, मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. यानी भारत का युवा वर्ग एक तरफ डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन रहा है, तो दूसरी तरफ नौकरी और कौशल विकास जैसे मुद्दों से भी जूझ रहा है.

सरकार की अलगअलग रिपोर्ट बताती हैं कि 15 से 29 साल के युवाओं की जिंदगी में मोबाइल और इंटरनेट की भूमिका काफी बढ़ गई है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आज स्मार्टफोन सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है, बल्कि पढ़ाई, नौकरी खोजने, ऑनलाइन पेमेंट, नई स्किल सीखने और जानकारी हासिल करने का जरिया बन चुका है. वहीं, रोजगार के मोर्चे पर सरकार का कहना है कि कई योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर दिए जा रहे हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भारत की युवा आबादी किस तरह डिजिटल हो रही है और रोजगार के क्षेत्र में क्या बदलाव देखने को मिल रहे हैं.
हर 100 में 97 युवा मोबाइल का कर रहे इस्तेमाल
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 साल के युवाओं में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 97.1 फीसदी है. इसका मतलब है कि हर 100 युवाओं में लगभग 97 युवा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं. मोबाइल की पहुंच अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी तेजी से बढ़ी है.
- 97.1% युवा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांवों में भी स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ी है.
- मोबाइल अब सिर्फ कॉल करने का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का माध्यम बन चुका है.
- ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष से ऊपर के लोगों की बेरोजगारी दर 5% से घटकर 4.6% हुई.
97% युवा मोबाइल यूजर
युवाओं के लिए मोबाइल अब मनोरंजन के साथसाथ शिक्षा और करियर का साधन बन गया है. ऑनलाइन क्लास, नौकरी की जानकारी, डिजिटल पेमेंट और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है.
इंटरनेट से जुड़े 94 फीसदी से ज्यादा युवा
रिपोर्ट के मुताबिक, 1529 साल के करीब 94.3 फीसदी युवा इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इंटरनेट ने युवाओं के सीखने और काम करने के तरीके को बदल दिया है. आज युवा ऑनलाइन कोर्स कर रहे हैं, नई तकनीक सीख रहे हैं और रोजगार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. इंटरनेट ने छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को भी नए अवसरों से जोड़ने का काम किया है.
बेरोजगारी में आई कमी
सरकार के अनुसार, रोजगार और बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे से लिए जाते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 के 5% से घटकर 2025 में 4.6% हो गई है. वहीं, 1529 साल के ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी दर 8.9% से घटकर 8.3% और पूरे देश में इसी आयु वर्ग की बेरोजगारी दर 10.9% से घटकर 9.9% दर्ज की गई है.
सरकार की रोजगार बढ़ाने वाली योजनाएं
- DDUGKY और PMEGP जैसी योजनाएं
सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना , प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और RSETI जैसी योजनाएं चला रही है. - रोजगार मेलों से नियुक्तियां
सरकार के अनुसार, रोजगार मेलों के जरिए अब तक देशभर में 12.5 लाख से ज्यादा नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं. इनका उद्देश्य युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. - Skill India Mission से प्रशिक्षण
Skill India Mission के तहत युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार नई स्किल सिखाई जा रही है. PMKVY, जन शिक्षण संस्थान, अप्रेंटिसशिप योजना और ITI के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. - MSME सेक्टर से रोजगार
सरकार के Udyam Registration Portal पर 8.9 करोड़ से ज्यादा MSME रजिस्टर्ड हैं. सरकार के मुताबिक, इन छोटे और मध्यम उद्योगों से देशभर में 39 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है. - नई रोजगार योजना का लक्ष्य
सरकार ने रोजगार बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरू की है. इस योजना के लिए ₹99,446 करोड़ का बजट रखा गया है. इसके जरिए अगले दो साल में 3.5 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है.
युवा, मोबाइल और नौकरी
डिजिटल दुनिया के साथ बढ़ीं नई चुनौतियां
मोबाइल और इंटरनेट ने युवाओं की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. आज पढ़ाई, नौकरी की तलाश, ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और मनोरंजन जैसे कई काम स्मार्टफोन के जरिए कुछ ही मिनटों में हो जाते हैं. हालांकि, डिजिटल दुनिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं. ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर ठगी, फर्जी लिंक, डेटा चोरी, फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर बढ़ता स्क्रीन टाइम युवाओं के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं.
इंटरनेट इस्तेमाल करने की जानकारी
ऐसे में सिर्फ डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराना ही काफी नहीं है, बल्कि युवाओं को सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल करने की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है. साइबर सुरक्षा के नियमों की समझ, डिजिटल साक्षरता और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल युवाओं को न केवल ऑनलाइन खतरों से बचाने में मदद करेंगी, बल्कि बदलते रोजगार बाजार में बेहतर अवसर हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.