World Lung Cancer Day: जिस बीमारी से एक साल में हुई 98 हजार मौत, उसको लेकर पद्मश्री डॉक्टर की बड़ी चेतावनी

World Lung Cancer Day: जिस बीमारी से एक साल में हुई 98 हजार मौत, उसको लेकर पद्मश्री डॉक्टर की बड़ी चेतावनी
डॉक्टरों ने दी सलाह : धूम्रपान ही नहीं, प्रदूषण और हुक्का भी बढ़ा रहे हैं लंग कैंसर का खतरा

World Lung Cancer Day: जिस बीमारी से एक साल में हुई 98 हजार मौत, उसको लेकर पद्मश्री डॉक्टर की बड़ी चेतावनी

 

लखनऊ, अमृत विचार : यदि किसी को खांसी आ रही है और वह लंबे समय तक है तो तत्काल अपने डॉक्टर की सलाह लें, संभव हो तो लो डोज का सिटी स्कैन चिकित्सक करा लें तो समय रहते एक बड़ी गंभीर बीमारी का पता चल सकता है और उसकी सर्जरी और इलाज हो सकता है। समय पर की गई सर्जरी ही जान बचाने में कारगर होगी। यह कहना है पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद का। उन्होंने यह बातें वर्ल्ड लंग कैंसर डे से एक दिन पूर्व केजीएमयू में आयोजित प्रेसवार्ता में कही हैं।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मुताबिक भारत में साल 2024 में 98 हजार लोगों की मौत लंग कैंसर यानी की फेफड़े के कैंसर से हो गई थी। यह आंकड़ा इसलिए भी डाराने वाला है क्योंकि उस साल 1 लाख 12 हजार नये लंग कैंसर के मरीजों की पहचान हुई थी। उन्हीं में से 98 हजार लोग अपना जीवन खो बैठे थे। हमारे हाथ में कुछ नहीं था कि हम उनको बचा सकें। लंग कैंसर ऐसी बीमारी है यदि समय पर यह पता न चले तो जीवन 6 महीने भी चलना मुश्किल होता है।

टीबी से कई गुना खतरनाक है लंग कैंसर

पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मुताबिक साल 2024 की बात करें तो उस साल पूरे भारत में 24 लाख नये लोगों को टीबी हुई, उनमें से करीब 3 लाख लोगों की मौत हो गई। जबकि लंग कैंसर से 1 लाख 12 हजार में से 98 हजार की जान चली गई। यह आंकड़े ही इस बीमारी की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं। यहां केवल धूम्रपान से नहीं बल्कि कैमिकल, धुयें आदि से भी लंग कैंसर होता है।

विश्व और भारत में होने वाले लंग कैंसर में अंतर

पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद बताते हैं कि मौजूदा दौर में सरकार कोशिश कर रही है, लेकिन अभी भी जनसंख्या के मुकाबले वह कोशिश पर्याप्त नहीं है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हमारे यहां अभी भी लंग कैंसर का इलाज सभी जगह होना संभव नहीं है, वह तो यहां तक कहते हैं कि इलाज होना तो दूर की बात पहचान होना ही कठिन है। लंग कैंसर की कई जगह डायग्नोसिस ही सही नहीं बन पाती। कोई टीबी को कैंसर तो कोई कैंसर को टीबी बता देता है। हमारे यहां लंग कैंसर होने की औसत आयु अलग है, एक समय था जब 60 से 70 वर्ष के लोगों में लंग कैंसर की बीमारी हुआ करती थी, आज कल यह कम उम्र में भी होने लगी है। विदेशों में लंग कैंसर होने की आज भी औसत आयु 60 से 70 वर्ष है, जबकि हमारे यहां 40 से 50 वर्ष। इतना ही नहीं विदेशों में 98 प्रतिशत लंग कैंसर के लिए धूम्रपान प्रमुख कारण है, जबकि हमारे देश में 75 फीसदी मामले लंग कैंसर के धूम्रपान की वजह से जबकि 25 फीसदी मामले अन्य वजहों से होते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 400 मरीजों पर यह शोध किया गया था, जिसमें यह बात निकल का सामने आई थी।

2020 में 18 लाख लोगों की गई थी जान

पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश

 

पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने बताया कि पूरी दुनिया में साल 2020 में करीब 22 लाख लोग लंग कैंसर से पीड़ित हुये थे, जिनमें से उसी साल 19 लाख लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पुरुष अधिक संख्या में ग्रसित होते हैं। समय पर पहचान ही इस बीमारी से जीवन को बचा सकती है।

केजीएमयू स्थित थोरेसिक सर्जरी विभाग के प्रो. शैलेंद्र यादव ने बताया कि लंग कैसर को लेकर हमारे यहां जागरूकता का बड़ा संकट है। यह बीमारी अर्ली स्टेज पर डिटेक्ट ही नहीं हो पाती, जो मरीज सर्जरी के लिए पहुंचते भी हैं वह भी काफी देर से। जिससे उनकी जान बचाना कठिन हो जाता है।

हुक्का और ईसिगरेट से ‘Gen Z’ को बचाना है जरूरी, 20 सिगरेट के बराबर करता है नुकसान

केजीएमयू के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. दर्शन बजाज बताते हैं कि हुक्का पीने से एक बार में 20 से 25 सिगरेट का धुंआ अंदर जाता है, जो फेंफड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है,वहीं कैमिकल का प्रयोग, अलगअलग माध्यमों से होने वाला प्रदूषण, शारीरिक गतिविधियों में गिरावट जैसी कई वजह है कि कम उम्र के बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, इसलिए जरूरी है कि हमे समाज के नवीनीकरण से दूर रहना है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर Gen Z’ को हुक्का और ई सिगरेट से बचाना है।

लंग कैंसर से जुड़ी ज़रूरी बातें और आंकड़े
 
1 लंग कैंसर दुनिया भर में दूसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है
2 लंग कैंसर से दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का मुख्य कारण है, जिससे हर साल लगभग 18 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
3 लंग कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान होता है, लेकिन अन्य जोखिम में धूम्रपान के धुएं जिसे हम सेकंडहैंड स्मोक भी कहते हैं उसके संपर्क में आना, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस और पर्यावरण के अन्य ज़हरीले पदार्थ प्रमुखता से शामिल हैं।
4 लंग कैंसर में 5 साल तक जीवित रहने की दर इस बात पर निर्भर करती है कि बीमारी की कितनी जल्दी पहचान हुई है। साथ ही यदि यह कैंसर शरीर के दूसरे अंगों को अपनी चपेट में ले चुका है तो 6 प्रतिशत लोग की पांच साल का जीवन पूरा कर पाते हैं, लंग कैंसर होने के बाद।

लंग कैंसर के लक्षण

प्रो. वेद प्रकाश बताते हैँ कि लगातार खांसी आना, खांसी के साथ खून आना,सीने में दर्द,सांस लेने में तकलीफ, आवाज़ बैठना या भारी होना, बिना किसी कारण वज़न कम होना, चेहरे और गर्दन में सूजन शामिल है। इसका एक लक्षण सिरदर्द भी हो सकता है।

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