
मुरादाबाद, अमृत विचार: नागफनी क्षेत्र के किसरोल स्थित प्राचीन बाबा झाड़खंडी शिव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सुबह से ही मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं। “हरहर महादेव” और “बमबम भोले” का परिसर में जयघोष गूंज रहा है। शहर के अलावा आसपास के क्षेत्र से भी लोग भगवान भोलेनाथ का पूजन कर आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।
मंदिर के पुजारी अमित नाथ बॉबी ने बताया कि मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शनपूजा के लिए खुला रहता है। पूरे दिन भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुखसमृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। सुबह और शाम होने वाली आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
काफी पुराना है मंदिर का इतिहास
बाबा झाड़खंडी शिव मंदिर का इतिहास कई दशकों पुराना माना जाता है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। समय के साथ मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण हुआ, लेकिन इसकी धार्मिक परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा और विधिविधान के साथ निभाई जाती हैं। बाबा झाड़खंडी मंदिर आज केवल एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि मुरादाबाद की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। सावन के पावन माह में मंदिर की भव्यता, भक्तों की अटूट आस्था और शिवमय वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मान्यता व आस्था के अनुसार यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं, इसलिए वर्षभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ अन्य देवीदेवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां नियमित रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजनकीर्तन और विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िये बाबा का जलाभिषेक करते हैं और पूरा परिसर शिवभक्ति में डूब जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ख्याल
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा पेयजल, प्रसाद वितरण, साफसफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्रमुख धार्मिक अवसरों पर भंडारे का भी आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामाजिक और धार्मिक संगठन भी सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।