बाल कहानी: फलों की सभा में क्यों बना छोटू आम ‘फलों का शहजादा’?

बाल कहानी: फलों की सभा में क्यों बना छोटू आम ‘फलों का शहजादा’?
बाल कहानी: फलों की सभा में क्यों बना छोटू आम ‘फलों का शहजादा’?

फलों की सभा चल रही थी। सभी फल स्वयं को श्रेष्ठ बता रहे थे। अपने गुणों का बखान कर रहे थे।मेरा जैसा रसीला तो कोई दूसरा फल है ही नहीं। बड़ेबड़े लोग मेरे मुरीद हैं। गर्मी आते ही मेरे चाहने वाले मेरी तलाश में घूमते रहते हैं। मैं बच्चों के मन को खूब लुभाती हूं।”, लीची ने कहा।

मैं तो बड़ा गुणकारी हूं। देवताओं का प्रिय फल हूं। मुझसे श्रेष्ठ तो कोई है ही नहीं।”, केले ने गर्दन ऊंची करते हुए कहा।

अरे मेरी तुलना तो किसी से है ही नहीं। मेरी लालिमा देखकर किसी के भी मुंह में पानी जाता है।”, सेब ने कहा।अरे, छोड़ो। जितना लोकप्रिय मैं हूं, उतना इस सभा में कोई भी फल नहीं है। डाक्टर तक मेरे रस को पीने की सलाह देते हैं।”, अनार उचक कर वोला।

इसी तरह तमाम फल अपने मुंह मियां मिठ्ठू बन रहे थे। वहां बैठा छोटू आम ये सब सुनकर उदास हो रहा था। उसे कुछ कहते नहीं बन रहा था। वह जोरजोर से रोने लगा। उसकी रोने की आवाज सुनकर दादी तरबूज वहां गई। उसने छोटू आम को गोद में उठा लिया।

क्या बात है। क्यों रो रहे हो छोटू।”, दादी तरबूज बोली। छोटू ने सारी बात बता दी।

ओह तो ये बात है। तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम तो फलों के शहजादे हो।  वो कैसे?” सभी फलों ने एक स्वर में कहा।अरे, तुम सबको नहीं पता। छोटू के परिवार की एक हजार प्रजातियां हैं। इसे भारत समेत पाकिस्तान और फिलिपींस के राष्ट्रीय फल का दर्जा हासिल है। आम का पेड़ बांग्लादेश का राष्ट्रीय पेड़ है। यह बहुत गुणकारी है। ये गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है। अभी छोटू छोटा है, तो फलों का शहजादा है। जब बड़ा हो जाएगा, तो फलों का राजा बन जायेगा।”, दादी ने बताते हुए कहा।

ये सुनकर सभी फलों ने आपसी मतभेद भुलाकर छोटू को उठा लिया और जोर से कहने लगे, “शहजादे की जय हो।छोटू ये सब सुनकर खिलखिलाकर हंसने लगा।

ललित शौर्य, बाल साहित्यकार

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