क्या आपको याद है कि आपके दादाजी या पिताजी सैलरी आते ही सबसे पहले कहां पैसे लगाते थे? जवाब ज्यादातर मामलों में एक ही होगा ‘फिक्स्ड डिपॉजिट ’, ‘सोना’ या ‘LIC की पॉलिसी’! लेकिन आज की तारीख में जब घर के सबसे छोटे मेंबर्स यानी ‘जेनजी ’ की पहली नौकरी लगती है, तो उसकी नजर बैंक एफडी पर नहीं बल्कि ‘म्यूचुअल फंड SIP’ और ‘क्रिप्टो’ पर होती है.

भारत में पिछले कुछ दशकों में निवेश का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. आर्थिक उदारीकरण, इंटरनेट क्रांति और फिनटेक ऐप्स के आने से भारतीय परिवारों की फाइनेंशियल सोच में एक बड़ा ‘पैराडाइम शिफ्ट’ आया है. इकोनॉमिक टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बेबी बूमर्स’ से लेकर ‘मिलैनियल्स’ और ‘जेनजी’ तक—हर जेनरेशन की रिस्क लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य एकदूसरे से काफी अलग हैं. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि भारत में 3 पीढ़ियों के बीच निवेश का यह अंदाज कैसे बदला:
बेबी बूमर्स : सुरक्षा और गारंटी प्राथमिकता
बूमर्स जेनरेशन ने वो दौर देखा जब नौकरियां सीमित थीं और आर्थिक अनिश्चितता ज्यादा थी. इसलिए इस पीढ़ी का मुख्य मकसद पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि सुरक्षित रखना था. उस दौर की जेनरेशन के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट सोने के जेवर, जमीन/मकान और LIC बेहतरीन विकल्प के तौर पर देखे जाते थे. उसका कारण भी था. तब की सोच ये थी कि पैसा डूबे न, चाहे रिटर्न थोड़ा कम मिले.” इंश्योरेंस को भी ये लोग निवेश का ही एक जरिया मानते थे.
नेशनल सेविंग इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर काफी हाई था. 1981 से लेकर 1991 तक एफडी की ब्याज दरें 10.50 फीसदी से लेकर 13.50 फीसदी के बीच रहीं. उसके बाद 2001 में रिटर्न का ये आंकड़ा सिंगल डिजिट में आ गया और बैंकों का औसत रिटर्न घटकर 9.50 फीसदी पर देखने को मिला. मौजूदा समय में फिक्स्ड डिपॉजिट में बैंकों की ओर से दिए जाने वाला औसत रिटर्न 5.50 फीसदी से लेकर 7 फीसदी के बीच है इसका मतलब है कि पिछले 30 से 35 बरस में एफडी पर रिटर्न करीब करीब 50 फीसदी तक कम हो चुका है.
मिलेनियल्स : वेल्थ क्रिएशन और SIP का दौर
मिलेनियल्स ने डिजिटल क्रांति की शुरुआत देखी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वे जोखिम उठाने के लिए तैयार थे क्योंकि उनका लक्ष्य केवल सेविंग करना नहीं, बल्कि दौलत बनाना और फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना था. इस दौर के निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड , डायरेक्ट स्टॉक्स, रियल एस्टेट और गोल्ड ETF/SGB में ज्यादा निवेश किया. इस पीढ़ी ने ‘म्यूचुअल फंड सही है’ की सोच को अपनाया और एसआईपी को भारत में मुख्यधारा में ला खड़ा किया.
इस दौर में अगर शेयर बाजार की बात करें तो निवेशकों की काफी कमाई कराई है. खास बात तो ये है कि बीते 25 बरस में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने काफी उतार चढ़ाव भी देखें हैं. आंकड़ों की बात करें तो साल 2000 में सेंसेक्स 4000 अंकों पर था, जो मौजूदा समय में 80 हजार अंकों के पर दिखाई दे रहा है. सेंसेक्स ने ढाई दशकों में निवेशकों को 20 गुना से ज्यादा का रिटर्न दिया है.
इसका मतलब है कि किसी निवेशक ने 2 लाख रुपए का निवेश किया होता तो उसकी वैल्यू 40 लाख रुपए हो गई होती. वैसे समय बीतते शेयर बाजार का रिटर्न भी कम हुआ है. बीते डेढ़ दशक में निवेशकों का रिटर्न 4.57 गुना रह गया. जबकि बीते 5 बरस में सेंसेक्स में सिर्फ 41 फीसदी की तेजी देखने को मिली है.
जेनजी : हाईरिस्क, तेज रिटर्न और डिजिटल एसेट्स
इन्फॉर्मेशन और स्मार्टफोन के दौर में पैदा हुई यह जेनरेशन बेहद टेकसैवी है. जेनजी के लिए फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब पारंपरिक तरीकों से अलग, जल्दी और ज्यादा रिटर्न कमाना है. स्मॉलकैप SIP, डायरेक्ट इक्विटी/इंट्राडे ट्रेंड्स, क्रिप्टो करेंसी, REITs और न्यूएज फिनटेक एसेट्स इस जेनरेशन के फेवरेट विकल्प हैं. कम उम्र में रिस्क लो, पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करो. जेनजी ट्रेडिशनल इंश्योरेंस और एफडी को प्राथमिकता नहीं देती और हर काम मोबाइल ऐप से करने में यकीन रखती है.
3 पीढ़ियों के निवेश पैटर्न का एक नजर में तुलना
| विशेषता | बेबी बूमर्स | मिलैनियल्स | जेनजी |
| मुख्य लक्ष्य | पूंजी सुरक्षा और रिटायरमेंट | वेल्थ क्रिएशन और बड़े लक्ष्य | वित्तीय आजादी और Instant रिटर्न |
| रिस्क लेने की क्षमता | बहुत कम | मध्यम से उच्च | बहुत अधिक |
| मुख्य एसेट्स | FD, सोना, LIC, रियल एस्टेट | SIP, स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड्स | क्रिप्टो, स्मॉलकैप SIP, टेक स्टॉक्स |
| फैसले का जरिया | पारिवारिक सलाह, बैंक एजेंट | वित्तीय सलाहकार, ऑनलाइन रिसर्च | फिनटेक ऐप्स, सोशल मीडिया |
नई पीढ़ियां अब टर्म इंश्योरेंस को सुरक्षा मानती हैं और निवेश के लिए म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार चुनती हैं. बूमर्स जहां फिजिकल गोल्ड खरीदते थे, वहीं मिलैनियल्स और जेनजी डिजिटल गोल्ड या गोल्ड सॉवरेन बॉन्ड को तरजीह देते हैं. ऐप्स के जरिए 500 रुपए की SIP भी संभव हो गई है, जिससे निवेश का लोकतंत्रीकरण हुआ है. ऐसे में हम देख सकते हैं कि बीती तीन पीढ़ियों में निवेश करने कर तरीका पूरी तरह से बदल गया है.