चंद्रशेखरन के दूसरे टेन्योर का रिपोर्ट कार्ड: टाटा संस की 6 कंपनियों के डूबे 70 हजार करोड़

चंद्रशेखरन के दूसरे टेन्योर का रिपोर्ट कार्ड: टाटा संस की 6 कंपनियों के डूबे 70 हजार करोड़

नटराजन चंद्रशेखरन इस्तीफा दे चुके हैं. फरवरी 2027 में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. उनका टाटा संस के चेयरमैन के रूप में काफी शानदार सफर रहा है. लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल को देखें तो कुछ कंपनियों के शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली है. करीब आधा दर्जन ऐसी कंपनियां जिनकी वैल्यूएशन में करीब 70 हजार करोड़ रुपए की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

एयर इंडिया के टेकओवर से लेकर नियो ऐप में निवेश ये तमाम काम इसी टेन्योर में हैं. जिनमें ग्रुप को कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है. यही कारण है कि ओवरऑल टेन्योर शानदार रहने के बाद भी चंद्रशेखरन के दूसरे टर्म में कुछ खास कंपनियों ने वैसा परफॉर्मेंस नहीं किया, जैया वो पहले करती आई हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो 6 कंपनियां कौन सी हैं और उन्हें दूसरे टर्म में कितना नुकसान हुआ है.

आधा दर्जन कंपनियों को मोटा नुकसान

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार टाटा संस की छह सबसे बड़ी घाटे वाली कंपनियों को वित्त वर्ष 2023 से लेकर वित्त वर्ष 2026 तक के चार फाइनेंशियल ईयर में कुल मिलाकर 68,341 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इस दौरान एन चंद्रशेखरन चेयरमैन के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल में थे. ये छह कंपनियां एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा प्रोजेक्ट्स, टाटा प्ले, टाटा इंटरनेशनल और टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर हैं. हालांकि टाटा ग्रुप की कई और कंपनियां भी घाटे में हैं, लेकिन इन छह कंपनियों को इसलिए चुना गया क्योंकि इस दौरान उन्हें भारी या लगातार नुकसान हुआ. चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल फरवरी 2022 में शुरू हुआ और फरवरी 2027 में खत्म होगा.

चार में हुआ कुल कितना नुकसान

  1. इस लिस्ट में एयर इंडिया सबसे आगे रही, जिसे वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2026 के बीच कुल 48,929 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इन छह कंपनियों के कुल नुकसान में अकेले एयर इंडिया का हिस्सा लगभग 72 प्रतिशत था.
  2. टाटा डिजिटल का हिस्सा दूसरा सबसे बड़ा था, जिसे कुल 12,154 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. एयर इंडिया और टाटा डिजिटल का कुल नुकसान 61,083 करोड़ रुपए था, जो कुल नुकसान का लगभग 89 प्रतिशत है.
  3. टाटा इंटरनेशनल को 2,514 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि टाटा प्रोजेक्ट्स को कुल 2,444 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. टाटा प्ले और टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान क्रमश 1,539 करोड़ रुपए और 761 करोड़ रुपए रहा.
  4. ये कैलकुलेशन टाटा संस और अलगअलग कंपनियों की तरफ से दी गई जानकारी में बताए गए प्रॉफिट और लॉस के आंकड़ों पर आधारित हैं. सालाना ट्रेंड से पता चला कि वित्त वर्ष 2024 में थोड़ी राहत मिली थी.

किस साल कितना नुकसान?

  1. इन छह कंपनियों का कुल नुकसान वित्त वर्ष 2023 में 14,078 करोड़ रुपए से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 6,322 करोड़ रुपए हो गया. इसमें टाटा प्रोजेक्ट्स को उस साल हुए मुनाफे से भी कुछ मदद मिली.
  2. हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में उनका नुकसान फिर से बढ़कर 17,219 करोड़ रुपए हो गया और फिर वित्त वर्ष 2026 में 78 प्रतिशत बढ़कर 30,722 करोड़ रुपए हो गया. सिर्फ आखिरी दो सालों में कुल नुकसान 47,941 करोड़ रुपए रहा, जो चार साल के कुल नुकसान का 70 फीसदी है.
  3. इस गिरावट में एयर इंडिया की बड़ी भूमिका रही. इसका नुकसान वित्त वर्ष 2023 में 11,388 करोड़ रुपए से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 4,444 करोड़ रुपए हो गया, लेकिन फिर वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 10,859 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2026 में दोगुने से भी ज्यादा होकर 22,238 करोड़ रुपए हो गया.
  4. टाटा डिजिटल का नुकसान भी ज़्यादा बना रहा. यह वित्त वर्ष 2023 में 1,370 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 4,974 करोड़ रुपए हो गया. टाटा इंटरनेशनल का नुकसान भी तेजी से बढ़ा वित्त वर्ष 2025 में 477 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 1,611 करोड़ रुपए हो गया.
  5. टाटा प्रोजेक्ट्स का नुकसान 697 करोड़ रुपए से बढ़कर 891 करोड़ रुपए हो गया, जबकि टाटा प्ले का नुकसान थोड़ा बढ़कर 552 करोड़ रुपए हो गया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। टाटा रियल्टी का नुकसान लगभग दस गुना बढ़कर 456 करोड़ रुपए हो गया.

जब चंद्रशेखरन ने दिया था निवेशकों को संदेश

टाटा संस के शेयरधारकों को भेजे वित्त वर्ष 2026 के संदेश में, चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया के बदलाव को “पांच से दस साल का सफ़र” बताया. इसमें फ्लीट को नया करना, ट्रेनिंग, सर्विस में बदलाव, नेटवर्क का विस्तार और पुराने सिस्टम व ऑर्गनाइजेशनल कल्चर में बड़े बदलाव शामिल हैं. उन्होंने वित्त वर्ष 2026 के दौरान एयरलाइन के सामने आई बड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया, जैसे एयरस्पेस का बंद होना, वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण ईंधन की ज्यादा कीमतें, फॉरेन करेंसी में उतारचढ़ाव और AI171 का क्रैश होना. चंद्रशेखरन ने माना कि कंपनी ने “कई मुश्किलों का सामना किया है” और टाटा न्यू का फ़ोकस फाइनेंशियल सर्विसेज और लॉयल्टी पर फिर से लाने के लिए एक “बड़े बदलाव” की घोषणा की, जिसमें पेमेंट, लेंडिंग और इंश्योरेंस पर ज्यादा जोर दिया जाएगा.

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