
सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें और वीडियो साझा करना अब सिर्फ एक यादगार पल साझा करने का मामला नहीं रह गया है। साइबर अपराध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) और इंटरनेट वॉच फाउंडेशन (IWF) ने अभिभावकों के लिए नई सुरक्षा सलाह जारी की है। एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि बच्चों की तस्वीरें गलत हाथों में पहुंचकर उनके लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। एजेंसियों के मुताबिक, AI तकनीक की मदद से बच्चों की सामान्य तस्वीरों को भी एडिट कर फर्जी और अश्लील फोटो-वीडियो तैयार किए जा रहे हैं।
वर्ष 2025 में ऐसे 8 हजार से अधिक AI-जनित फोटो और वीडियो सामने आए, जिनमें बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी आपत्तिजनक कंटेंट पाया गया। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि बच्चों की तस्वीर साझा करना जरूरी हो, तो पहले सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग जरूर जांच लें। कोशिश करें कि पोस्ट केवल प्राइवेट अकाउंट या क्लोज फ्रेंड्स तक ही सीमित रहे।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि तस्वीर में बच्चे का स्कूल, घर का पता, यूनिफॉर्म, लोकेशन या अन्य व्यक्तिगत जानकारी दिखाई न दे। सुरक्षा एजेंसियों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि केवल नई पोस्ट ही नहीं, बल्कि पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद पुरानी तस्वीरों की भी समीक्षा करें। यदि किसी फोटो में बच्चे की पहचान या निजी जानकारी उजागर हो रही है, तो उसे तुरंत हटा देना बेहतर होगा।
रिश्तेदार और स्कूल भी रखें ध्यान
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि रिश्तेदार, दोस्त, स्कूल, क्लब या अन्य संस्थाएं बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले अभिभावकों की अनुमति अवश्य लें। इससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और निजता को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है.
क्या करें, क्या न करें
बच्चों की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से पोस्ट करने से बचें।
पोस्ट करने से पहले प्राइवेसी सेटिंग की जांच करें।
फोटो में स्कूल, घर, लोकेशन या अन्य निजी जानकारी न दिखने दें।
पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट की नियमित समीक्षा करें।
किसी भी संस्था या व्यक्ति को बच्चों की तस्वीर साझा करने से पहले अभिभावकों की अनुमति लेनी चाहिए।