Snake Bite Treatment: मौत को अंजाम देने वाली सांप के जहर की एक बूंद कैसे बनती है जीवनदायिनी, खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए बनती हैं ये दवाएं

Snake Bite Treatment: मौत को अंजाम देने वाली सांप के जहर की एक बूंद कैसे बनती है जीवनदायिनी, खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए बनती हैं ये दवाएं

Snake Bite Treatment: सांप का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा होने लगता है, क्योंकि जहरीले सांप का एक डंक इंसान की जान भी ले सकता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही जहर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। जिस जहर से इंसान की मौत हो सकती है, उसी जहर से ऐसी दवाइयां और इंजेक्शन बनाए जाते हैं जो हर साल लाखों लोगों की जान बचाते हैं।

Snake Bite Treatment: मौत को अंजाम देने वाली सांप के जहर की एक बूंद कैसे बनती है जीवनदायिनी, खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए बनती हैं ये दवाएं

आज दुनिया भर के वैज्ञानिक सांप के जहर में मौजूद प्रोटीन और एंजाइम पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं। इनकी मदद से एंटीवेनम, हार्ट की दवाएं, ब्लड थिनर, खून बहने के लिए  रोकने वाली दवाएं और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की नई संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।

सबसे बड़ी जीवनरक्षक दवा: एंटीस्नेक वेनम

अगर किसी व्यक्ति को जहरीला सांप काट ले, तो उसके इलाज की सबसे महत्वपूर्ण दवा एंटीस्नेक वेनम होती है। भारत में उपलब्ध पॉलीवेलेंट एंटीवेनम चार प्रमुख जहरीले सांपों के जहर के खिलाफ काम करता है। ये रहे वो..

  1. इंडियन कोबरा
  2. कॉमन करैत
  3. रसेल वाइपर
  4. सॉस्केल्ड वाइपर

यह इंजेक्शन शरीर में फैल चुके जहर को निष्क्रिय करने का काम करता है। इसलिए सांप के काटने के बाद मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाया जाए, उतनी ही जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे बनता है एंटीवेनम?

एंटीवेनम बनाने की प्रक्रिया बेहद वैज्ञानिक और सावधानीपूर्ण होती है। जिसमें सबसे पहले सांप से जहर निकाला जाता है। इसके बाद Specially Trained Specialist सुरक्षित तरीके से सांप के विषदंत से जहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया को ‘Venom Milking’ कहा जाता है।

इसके बाद जानवरों में प्रतिरक्षा विकसित करना

निकाले गए जहर की बेहद कम मात्रा घोड़ों को दी जाती है। इससे जानवर बीमार नहीं होते बल्कि उनका शरीर उस जहर के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है।

एंटीबॉडी निकालना

कुछ हफ्ते बाद घोड़े के खून से प्लाज्मा अलग किया जाता है। इसी प्लाज्मा से एंटीबॉडी निकालकर शुद्ध की जाती हैं।

इंजेक्शन तैयार करना

इन्हीं एंटीबॉडी को प्रोसेस करके एंटीस्नेक वेनम इंजेक्शन तैयार किया जाता है, जिसे अस्पतालों में मरीजों को लगाया जाता है।

सांप के जहर से बनने वाली दूसरी महत्वपूर्ण दवाएं

हाई ब्लड प्रेशर की दवा कैप्टोप्रिल

दुनिया की सबसे सफल दवाओं में शामिल कैप्टोप्रिल का विकास ब्राजील के पिट वाइपर के जहर पर हुए रिसर्च से हुआ था।

यह दवाई 

हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है।
हार्ट फेलियर के मरीजों में उपयोग होती है।
किडनी की कुछ बीमारियों में भी दी जाती है।

आज ACE Inhibitor समूह की कई दवाओं की शुरुआत इसी खोज से हुई।

हार्ट अटैक में इस्तेमाल होने वाली दवाएं

एप्टिफिबेटाइड

यह दवा रैटलस्नेक के जहर में पाए जाने वाले प्रोटीन से प्रेरित है।

इसका उपयोग हार्ट अटैक के दौरान, एंजियोप्लास्टी के समय, खून के थक्के बनने से रोकने में किया जाता है।

टायरोफिबान

यह दवा सॉस्केल्ड वाइपर के जहर में पाए जाने वाले तत्वों से विकसित हुई है। यह भी रक्त के थक्के बनने से रोकती है और गंभीर हृदय रोगियों के इलाज में दी जाती है।

रक्तस्राव रोकने वाली दवाएं

सांप के कुछ जहर खून को तेजी से जमा देते हैं। इसी गुण का उपयोग चिकित्सा विज्ञान में किया जाता है।

हेमोकोएगुलेज

इसका उपयोग ऑपरेशन के दौरान, गंभीर चोट लगने पर, नाक से अधिक खून बहने पर अन्य रक्तस्राव रोकने में किया जाता है।

बैट्रोक्सोबिन

यह भी कुछ पिट वाइपर प्रजातियों के जहर से निकाले गए एंजाइम पर आधारित दवा है। इसका इस्तेमाल कुछ देशों में रक्त जमने की प्रक्रिया और विशेष चिकित्सीय परीक्षणों में किया जाता है।

क्या कैंसर की दवा भी बनेगी?

वैज्ञानिक कोबरा सहित कई जहरीले सांपों के जहर में मौजूद साइटोटॉक्सिन और अन्य प्रोटीन पर लगातार शोध कर रहे हैं। शुरुआती शोध बताते हैं कि ये तत्व कुछ कैंसर कोशिकाओं को निशाना बना सकते हैं। हालांकि अभी तक सांप के जहर से बनी कोई स्वीकृत कैंसर की दवा उपलब्ध नहीं है। इस क्षेत्र में अभी रिसर्ज जारी है।

ब्राजील में कैसे बनता है एंटीवेनम?

ब्राजील का बुतान्तन इंस्टीट्यूट दुनिया के सबसे बड़े एंटीवेनम उत्पादन केंद्रों में से एक है। यहां विशेषज्ञ हर महीने हजारों सांपों से सावधानीपूर्वक जहर निकालते हैं। इसके बाद उसी जहर की छोटी मात्रा घोड़ों को दी जाती है, जिनके शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी से एंटीवेनम तैयार किया जाता है। यहीं तैयार दवा ब्राजील के अस्पतालों में भेजी जाती है और कई देशों को भी उपलब्ध कराई जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या कहता है?

WHO के अनुसार  हर वर्ष दुनिया में लगभग 54 लाख लोगों को सांप काटते हैं।  इनमें से 18 से 27 लाख मामलों में जहरीले सांप का जहर शरीर में प्रवेश करता है। हर साल लगभग 81,000 से 1,38,000 लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। लाखों लोग स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। इसी कारण WHO ने सर्पदंश को एक Neglected Tropical Disease के रूप में सूचीबद्ध किया है।

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ध्यान रखें

सांप के काटने पर झाड़फूंक या घरेलू इलाज पर भरोसा न करें। मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। एंटीवेनम केवल डॉक्टर की निगरानी में ही लगाया जाता है। हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन पहचान करने की कोशिश में समय बर्बाद करना खतरनाक हो सकता है।

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