Quick Samachar: तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड जीत चुके और पद्मश्री सम्मानित संगीतकार रिकी केज हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खास सीरीज ‘एक्सप्रेसो’ के 14वें एडिशन का हिस्सा बने। यहां उन्होंने अपने करियर, म्यूजिक, क्लाइमेट चेंज और पीएम मोदी समेत कई मुद्दों पर बात की। बातचीत के दौरान रिकी केज ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर मेनस्ट्रीम संगीत से दूरी बनाए रखी।
उनका मानना है कि किसी कलाकार का काम उसकी पहचान को दर्शाना चाहिए और वह ऐसे गीतों के बजाय उस संगीत के लिए पहचाने जाना पसंद करेंगे जो उनकी सोच और व्यक्तित्व को परिभाषित करता हो। उन्होंने भारत में शास्त्रीय संगीत के प्रति लोगों के नजरिए पर भी बात की, जिसे उन्होंने ‘रवि शंकर सिंड्रोम’ कहा। साथ ही, उन्होंने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक बातचीत ने उन्हें अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक पर काम करने की प्रेरणा दी।
करियर की शुरुआत में लेना पड़ा कड़ा फैसला: रिकी
इंटरव्यू में रिकी ने कहा, “मुझे अपने करियर की शुरुआत में ही एक कड़ा फैसला लेना था। वो ये था कि क्या मैं ऐसे गानों के लिए बहुत मशहूर होऊं , जो मेरी पहचान नहीं बताते? या मैं ऐसे गानों के लिए कम मशहूर होऊं, जो एक इंसान के तौर पर मेरी पहचान बताते हैं? इसलिए मैंने दूसरा ऑप्शन चुना कि मैं भले ही कम मशहूर होऊं, लेकिन उन गानों के लिए जाना जाऊं, जो एक इंसान के तौर पर मेरी पहचान बताते हैं।”
केज ने आगे बताया कि इसी सोच ने आगे चलकर उनके पूरे काम को आकार दिया। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ ऐसा ही संगीत बनाता हूं, जिसमें कोई मजबूत सामाजिक या पर्यावरण से जुड़ा संदेश हो। मैं बस इसी तरह का संगीत बनाता हूं।”
क्या है रवि शंकर सिंड्रोम?
ग्रैमी अवॉर्ड जीतने वाले म्यूजिक कंपोजर ने भारत के अपने म्यूजिकल हेरिटेज के साथ उनके रिश्ते पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने दर्शकों को उस चीज के बारे में बताया जिसे वह ‘रवि शंकर सिंड्रोम’ कहते हैं। दुनिया भर में सितार वादक पंडित रवि शंकर के कॉन्सर्ट में शामिल होने के अपने अनुभवों के आधार पर केज ने कहा कि कई भारतीय महान म्यूजिशियन की तारीफ तो करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे उनके काम को गहराई से समझते हों।
उन्होंने कहा, “हम उन्हें एक शख़्सियत के तौर पर तो जानते हैं, लेकिन उनके संगीत को नहीं जानते।” रिकी केज ने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीतकार अक्सर विदेशों में अपने देश की तुलना में ज्यादा तारीफ पाते हैं, जबकि वे पूरी तरह से भारतीय परंपराओं पर आधारित संगीत पेश करते हैं। उन्होंने कहा, “हम खुद अपने उस संगीत की तारीफ नहीं करते जिसे असल में पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है। शायद भारत के बजाय सैन फ़्रांसिस्को या न्यूयॉर्क जैसी जगहों पर लोग पंडित रवि शंकर के किसी एल्बम का नाम ज्यादा आसानी से बता पाएंगे।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कही ये बात
बातचीत में आगे रिकी केज ने दुनिया भर में भारत के बढ़ते सांस्कृतिक प्रभाव पर भी चर्चा की। 2014 के बाद के सालों पर बात करते हुए केज ने बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कला और संस्कृति को देखने के नजरिए में बदलाव महसूस हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं कई वजहों से पीएम मोदी की बहुत तारीफ करता हूं।” उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि भारतीय संगीत, संस्कृति और कला को दुनिया भर में ‘सॉफ्ट पावर’ के एक अहम रूप में देखा जाने लगा है।
फिर रिकी केज ने 2015 में अपना पहला ग्रैमी अवॉर्ड जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी पहली मुलाकात के बारे में भी बताया। शुरू में जो बातचीत बस थोड़ी देर की लग रही थी, वह क्लाइमेट चेंज, सस्टेनेबिलिटी और ग्लोबल एनवायरनमेंटल बातचीत में भारत की भूमिका पर एक घंटे लंबी चर्चा में बदल गई।
केज के अनुसार, इस चर्चा ने उन्हें ‘शांति संसार’ बनाने के लिए प्रेरित किया। यह एक ऐसा एल्बम है, जिसमें दुनिया भर के म्यूजिशियन शामिल हैं और यह क्लाइमेट एक्शन और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की फिलॉसफी पर आधारित है। उन्होंने याद किया कि कैसे पीएम मोदी ने उन्हें इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया और बाद में इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर एल्बम का समर्थन किया।
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