भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी और ‘क्वाड’ गठबंधन के भविष्य को लेकर एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक चौंकाने वाली घोषणा करते हुए ‘US इंडोपैसिफिक कमांड’ का नाम बदलकर एक बार फिर उसका सात दशक पुराना नाम—’US पैसिफिक कमांड’ —करने का आधिकारिक फैसला लिया है।
इस प्रशासनिक और प्रतीकात्मक बदलाव के बीच, अमेरिकी मिलिट्री कमांड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का एक गलत नक्शा प्रदर्शित कर दिया है। इस नक्शे में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जिस पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया होने की संभावना है।
2018 के ऐतिहासिक फैसले को अमेरिका ने पलटा
पेंटागन का यह ताजा फैसला साल 20132018 के दौरान विकसित हुई अमेरिकी रणनीतिक सोच के बिल्कुल विपरीत है। साल 2018 में अमेरिका के तत्कालीन रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते वैश्विक महत्व और पैसिफिक सुरक्षा के साथ इसके जुड़ाव को रेखांकित करने के लिए इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर ‘इंडोपैसिफिक कमांड’ किया था।
नाम बदलने के पीछे अमेरिका का तर्क:
ऐतिहासिक विरासत: अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा है कि पुराने नाम को बहाल करने का मकसद कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों, उसकी संस्थागत विरासत का सम्मान करना और पैसिफिक में सेवा करने वाले सैनिकों में गर्व की भावना को बढ़ावा देना है।
ऑपरेशनल भूमिका में बदलाव नहीं: अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नाम से ‘इंडो’ शब्द हटने के बावजूद कमांड के ऑपरेशनल मिशन, रणनीतिक दायरे या भौगोलिक सीमाओं में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसकी जिम्मेदारी अभी भी अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी समुद्री सीमा तक फैली रहेगी।
क्यों बेहद खास और शक्तिशाली है यह अमेरिकी कमांड?
मूल रूप से 1 जनवरी, 1947 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन के कार्यकाल में स्थापित यह कमांड अमेरिकी सैन्य प्रणाली में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी एकीकृत लड़ाकू कमांड है।
मुख्यालय और दायरा: हवाई में हेडक्वार्टर वाली यह कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों की देखरेख करती है।
ऐतिहासिक महत्व: इस कमांड ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने, कोरियाई और वियतनाम युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों का समन्वय करने और बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता व आपदा राहत कार्यों का नेतृत्व किया है।
भारत से जुड़ाव: भारत के लिए यह कमांड अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का सबसे अहम जरिया रही है। भारतअमेरिका के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री तालमेल और व्यापक इंडोपैसिफिक रणनीति के तहत खुफिया जानकारी साझा करने का काम इसी कमांड के जरिए संचालित होता है।
शशि थरूर का तंज: “क्या यह ‘क्वाड’ के ताबूत में एक और कील है?”
अमेरिका द्वारा अपनी सैन्य रणनीति के नाम से ‘इंडो’ शब्द को हटाए जाने और भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने पर भारत में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी रक्षा विभाग के इस आदेश का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बेहद तीखा तंज कसा। थरूर ने लिखा:
“क्या यह ‘क्वाड’ के ताबूत में एक और कील है?”
जानकारों की चिंता: थरूर की यह टिप्पणी उन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की चिंताओं को दर्शाती है जो मानते हैं कि नाम से ‘इंडो’ शब्द को गायब करना वाशिंगटन के रणनीतिक झुकाव में बदलाव का संकेत हो सकता है। यह कदम चीन के खिलाफ बने भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के ‘क्वाड’ समूह की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े करता है।
यद्यपि अमेरिकी प्रशासन लगातार यह दलील दे रहा है कि यह केवल एक प्रशासनिक और नामकरण से जुड़ा बदलाव है और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ “आजाद और खुले क्षेत्र” को बनाए रखने की उसकी प्रतिबद्धता अटूट रहेगी, लेकिन प्रतीकों की दुनिया में इसे एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच नक्शे के विवाद और नाम बदलने के इस फैसले पर कड़े कूटनीतिक संवाद देखने को मिल सकते हैं।

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— Shashi Tharoor June 17, 2026

 

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