
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। भारत में कथित अवैध घुसपैठ और उसके आर्थिक नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा शिकंजा कसा है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की भारत में कथित घुसपैठ से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत ईडी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल से करीब 40 लाख रुपये नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए।
चार राज्यों के 13 ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश के देवबंद , दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़ और पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना तथा मुर्शिदाबाद में करीब 13 स्थानों पर छापेमारी की।
एफसीआरए से जुड़े ट्रस्ट की भूमिका भी जांच के घेरे में
ईडी विशेष रूप से एक ऐसे गिरोह की जांच कर रही है, जो कथित तौर पर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत एक लोक परमार्थ न्यास के माध्यम से काम करता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस न्यास को ब्रिटेन की कुछ संस्थाओं से विदेशी चंदा मिला था, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है।
40 लाख रुपये और 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के कलीलकापुर स्थित हरोरा अलजामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम के कार्यालय और पुस्तकालय से छापेमारी के दौरान करीब 40 लाख रुपये नकद और 180 ग्राम वजन के सोने के सिक्के बरामद किए गए।
यूपी ATS की FIR के आधार पर दर्ज हुआ था मामला
ईडी का यह मामला वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश आतंकवादरोधी दस्ते द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। एफआईआर में आरोप है कि एक संगठित गिरोह कथित रूप से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने, उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने तथा देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने का काम करता था।
‘फंडिंग नेटवर्क’ के जरिए पुनर्वास का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, जांच में एक जटिल वित्तीय नेटवर्क सामने आया है, जिसमें कुछ परमार्थ न्यास और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि विदेशी चंदे की रकम विभिन्न बैंक खातों और बिचौलियों के जरिए स्थानांतरित की जाती थी।
ईडी को आशंका है कि संदिग्ध लोगों के पुनर्वास के लिए 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये की छोटीछोटी किस्तों में धनराशि भेजी जाती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस धन का उपयोग कथित तौर पर घुसपैठियों को भारत में बसाने, रोजगार उपलब्ध कराने और ईरिक्शा जैसी आजीविका के साधन उपलब्ध कराने में किया गया।
सीमावर्ती जिलों पर भी जांच एजेंसियों की नजर
अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में सक्रिय एक समूह कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में घुसपैठ कराने में मदद करता था, जबकि दूसरा समूह उनके लिए पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कर उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में भेजने का काम करता था। मामले में जांच जारी है।