Quick Samachar: दुनिया की सबसे मशहूर पिज्जा चेन में शामिल पिज्जा हट की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी. साल 1958 में अमेरिका के कंसास राज्य में रहने वाले दो भाइयों, फ्रैंक और डैन कार्नी ने अपनी मां से 600 डॉलर उधार लेकर एक छोटा सा खोला था. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटा कारोबार आगे चलकर दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में फैल जाएगा.

रेस्टोरेंट के बाहर लगे बोर्ड पर केवल आठ अक्षरों की जगह थी, इसलिए इसका नाम “पिज्जा हट” रखा गया. शुरुआत में दोनों भाइयों ने मुफ्त पिज्जा स्लाइस बांटकर और छात्रों को आकर्षित करके ग्राहकों की संख्या बढ़ाई. उनका यह प्रयोग सफल रहा और जल्द ही कंपनी ने फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार शुरू कर दिया.
दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बनने तक का सफर
पिज्जा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ पिज्जा हट ने तेजी से विस्तार किया। 1971 तक यह बिक्री के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन चुकी थी. 1969 में शुरू किए गए लाल छत वाले इसके रेस्टोरेंट ब्रांड की पहचान बन गए. 1977 में पेप्सिको ने 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा में कंपनी का अधिग्रहण कर लिया. बाद में यह कारोबार यम ब्रांड्स के तहत आ गया, जिसके पास केएफसी और टैको बेल जैसे बड़े ब्रांड भी हैं.
अपने सुनहरे दौर में पिज्जा हट फैमिली डाइनिंग, बुफे लंच और बड़े रेस्टोरेंट्स के लिए जाना जाता था. दुनिया भर में इसके करीब 20,000 आउटलेट्स तक पहुंच गए.
डोमिनोज और ऑनलाइन डिलीवरी ने बढ़ाई चुनौती
समय के साथ ग्राहकों की पसंद बदलने लगी। 1980 के दशक में डोमिनोज ने होम डिलीवरी मॉडल पर जोर दिया और तेजी से बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाई. दूसरी तरफ पिज्जा हट बड़े डाइनइन रेस्टोरेंट्स पर निर्भर रहा. स्मार्टफोन और फूड डिलीवरी ऐप्स के दौर में यह चुनौती और बढ़ गई. ग्राहकों ने घर बैठे खाना मंगाना शुरू कर दिया, जिससे पिज्जा हट का पारंपरिक बिजनेस मॉडल कमजोर पड़ने लगा. बढ़ती लागत, महंगाई और बदलती खानपान की आदतों ने भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ाईं.
2.7 अरब डॉलर की डील में बंटा कारोबार
जून 2026 में यम ब्रांड्स ने पिज्जा हट के कारोबार को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया. कंपनी चीन के बाहर का अंतरराष्ट्रीय कारोबार लॉन्गरेंज कैपिटल को 1.5 अरब डॉलर में बेच रही है, जबकि चीन का कारोबार यम चाइना होल्डिंग्स 1.2 अरब डॉलर में खरीदेगी. कुल मिलाकर यह सौदा 2.7 अरब डॉलर यानी करीब 23,000 करोड़ रुपये का है.
दिलचस्प बात यह है कि जहां कई देशों में पिज्जा हट संघर्ष कर रहा है, वहीं चीन में कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है. यही वजह है कि यम चाइना ने इस कारोबार पर बड़ा दांव लगाया है. यह सौदा इस बात का उदाहरण है कि बदलते बाजार में बड़ी से बड़ी कंपनियों को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है.
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