Quick Samachar: दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में सोने का नया भंडार मिला है. वहां खनन शुरू भी हो चुका है. उम्मीद है कि अभी आसपास कई और जगहों पर सोना होने संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस सूचना से राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक में नई ऊर्जा का संचार हुआ है.आइए, इसी बहाने समझते हैं कि देश में सोना खदानें कहांकहां हैं? कितना सोना देश में हर साल निकलता है? नई खदानें मिलने से क्या कुछ बदलने वाला है?

Gold Producing States: न बंगाल, न राजस्थान, भारत में कहां है सोने का सबसे बड़ा गढ़? आंध्र प्रदेश में मिला नया भंडार​

भारत में सोने का मोह सदियों पुराना है. देश में क्या अमीर और क्या गरीब, सोना सबको आकर्षित करता है. इसका इस्तेमाल जेवरात के रूप में होता है तो बड़ी संख्या में लोग निवेश की दृष्टि भी रखते हैं. दुनिया भर के रिजर्व बैंक भी सोने का भंडार रखते हैं और इसके सहारे अर्थव्यवस्था को बैलेंस करते हैं. हाल ही में आंध्र प्रदेश में सोने के नए भंडार मिलने की सूचना ने देश को फिर से उत्साहित कर दिया है. देश की अर्थव्यवस्था के लिए इसे एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है.

कर्नाटक: देश में सोने का पावरहाउस

कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण उत्पादक राज्य है. देश का लगभग 99 फीसदी सोना अकेले इसी राज्य से आता है.

  • हट्टी गोल्ड माइंस: रायचूर जिले में स्थित हट्टी की खदानें भारत की एकमात्र ऐसी खदानें हैं, जहाँ आज भी व्यावसायिक स्तर पर खुदाई चल रही है. यहाँ सोने का खनन साल 1902 से चल रहा है. वर्तमान में यहाँ हर साल लगभग 1.5 से 2 टन सोना निकाला जाता है.
  • कोलार गोल्ड फील्ड्स: यह दुनिया की सबसे गहरी खदानों में से एक थी. यहां साल 1880 में ब्रिटिश काल के दौरान बड़े पैमाने पर खुदाई शुरू हुई थी. लगभग 121 वर्षों तक खुदाई चलने के बाद साल 2001 में सोने की कमी और उच्च लागत के कारण इसे बंद कर दिया गया. अपने पूरे कार्यकाल में यहाँ से लगभग 800 टन सोना निकला.

कर्नाटक देश को सबसे ज्यादा सोना देने वाला राज्य है.

आंध्र प्रदेश: उभरता हुआ नया विकल्प

आंध्र प्रदेश सोने के उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहा है, और अब यहां से बड़ी उम्मीदें जगी है. राज्य सरकार का दावा है कि वह देश में सोना उत्पादन में अव्वल हो सकता है.

  • जोन्नागिरी की खदान: कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में एक बड़ा स्वर्ण भंडार मिला है. यहाँ 50 टन सोना होने का अनुमान लगाया गया है. यह अभी सिर्फ एक हिस्से की रिपोर्ट है. यह आजाद भारत की पहली निजी स्वर्ण खदान है. यहां से हर साल एक टन सोना निकालने का लक्ष्य है.
  • रामगिरि खदानें: अनंतपुर जिले में स्थित रामगिरि स्वर्ण क्षेत्र में लंबे समय तक खुदाई हुई, लेकिन फिलहाल यहाँ काम धीमी गति पर है. जाव्वाकुला, चिगुरूकुंटा में भी सोना मिलने की प्रबल संभावना जताई गई है.
  • चित्तूर में मिला नया भंडार: हाल ही में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने चित्तूर जिले के कुप्पम क्षेत्र में सोने के नए ब्लॉक खोजे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ सोने की अच्छी मात्रा मौजूद है.
  • उत्पादन: फिलहाल आंध्र प्रदेश से उत्पादन बहुत कम है, लेकिन नए क्षेत्रों की नीलामी के बाद यहाँ सालाना 0.5 टन तक उत्पादन की संभावना जताई जा रही है. यह उत्पादन धीरेधीरे बढ़ेगा और उम्मीद का है कि आंध्र प्रदेश इस मामले में अव्वल हो सकता है.

देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में सोने का उत्पादन होता है. फोटो: Getty Images

झारखंड: स्वर्णरेखा का चमत्कार

झारखंड की धरती खनिजों का भंडार है. यहां सोने का उत्पादन दशकों से हो रहा है.

  • पलासन और सरायकेला: झारखंड के इन क्षेत्रों में सोने की खदानें मौजूद हैं। यहाँ स्वर्णरेखा नदी भी बहती है, जिसकी रेत से ग्रामीण लोग वर्षों से सोना छान रहे हैं.
  • लवा माइंस: यहां आजादी के बाद से ही छोटे स्तर पर खुदाई चलती रही है. वर्तमान में झारखंड से सालाना लगभग 10 से 50 किलोग्राम के बीच सोना प्राप्त होता है, हालांकि व्यावसायिक खनन को विस्तार दिया जा रहा है.

राजस्थान की धरती में करीब 113 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क दबा है. फोटो: Pexels

राजस्थान: सोने का नया पता

राजस्थान तेजी से स्वर्ण नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है.

बांसवाड़ा और उदयपुर: यहां भोकियाजगपुरा क्षेत्र में सोने के भंडार प्रमाणित हो चुके हैं. यहां खोज का काम 1990 के दशक में तेज हुआ था. अनुमान है कि राजस्थान की धरती में करीब 113 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क दबा है. यहां अभी बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होना बाकी है, जिसे जल्द ही नीलामी के जरिए शुरू किया जाएगा.

भारत में सोने के उत्पादन की वर्तमान स्थिति

भारत अपनी सोने की कुल खपत का एक बहुत छोटा हिस्सा ही खुद पैदा कर पाता है. भारत में वर्तमान में हर साल लगभग 1.6 से 2.2 टन सोने का उत्पादन होता है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 98 फीसदी सोना स्विट्जरलैंड, यूएई, दक्षिण अफ्रीका से आयात करता है. हर साल भारत 800 से 900 टन सोना बाहर से मंगाता है. भारत सरकार ने अब नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के जरिए खोज तेज कर दी है. देश भर में करीब 500 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क होने का अनुमान है.

हर साल भारत 800 से 900 टन सोना बाहर से मंगाता है. फोटो: Getty Images

सोने की खोज का महत्व और भविष्य

आंध्र प्रदेश और राजस्थान में मिल रहे नए भंडार भारत की किस्मत बदल सकते हैं. भारत हर साल अरबों डॉलर सोने के आयात पर खर्च करता है. घरेलू उत्पादन बढ़ने से यह पैसा देश में ही रहेगा. खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के आने से हजारों कुशल इंजीनियरों और श्रमिकों को काम मिलेगा. अब डीप सीटेड माइनिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे एक हजार मीटर से ज्यादा नीचे दबे सोने को भी निकाला जा सकेगा.

संक्षेप में कहें तो आंध्र प्रदेश से आई नई सूचना ने नई ऊर्जा दी है. यह बात अब छिपी नहीं है कि भारत की भूमि में अरबों का सोना छिपा है, बस उसे वैज्ञानिक तरीके से निकालने की जरूरत है. कर्नाटक की सक्रिय खदानें, आंध्र प्रदेश के नए भंडार और राजस्थान की संभावनाएं यह बताती हैं कि भारत भविष्य में अपनी सोने की चिड़िया वाली छवि को दोबारा हासिल कर सकता है. सरकार की नई खनन नीति और निजी कंपनियों की भागीदारी से आने वाले 10 वर्षों में भारत का स्वर्ण उत्पादन बढ़ने की पूरी उम्मीद है.