Quick Samachar: हर साल ‘वर्ल्ड किडनी कैंसर डे’ हमें इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने का मौका देता है। भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब लाइफस्टाइल और खानपान की अनहेल्दी आदतें आज इस बीमारी के मामलों को तेजी से बढ़ा रही हैं। चूंकि किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत शांत होते हैं, इसलिए समय पर इसकी पहचान और सही डॉक्टरी सलाह ही सबसे बड़ा बचाव है। भारत में किडनी कैंसर के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। GLOBOCAN के 2025 के अनुमान के अनुसार, किडनी कैंसर के मामलों में भारत दुनिया में चीन, अमेरिका और रूस के बाद चौथे स्थान पर है। वर्ष 2025 में देश में किडनी कैंसर के 17,480 नए मामले दर्ज किए गए। यह बीमारी अब लगभग सभी आयु वर्गों में फैल रही है, जबकि पुरुषों में इसके मामले महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुने यानी 2:1 अनुपात हैं।

बेंगलुरु स्थित Sakra World Hospital के डायरेक्टर रीनल ट्रांसप्लांट एवं यूरो ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी एवं एंड्रोलॉजी, डॉ. गोवर्धन के. रेड्डी ने बताया कि भारतीय आंकड़ों के अनुसार, रीनल सेल कार्सिनोमा पश्चिमी देशों की तुलना में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में अधिक पाया जा रहा है। हालांकि इन मरीजों में ट्यूमर अधिक एडवांस स्टेज में पाया जाता है और उनकी जीवित रहने की दर भी अपेक्षाकृत कम होती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रीनल कैंसर क्या है और युवाओं में इसके लक्षण कौनकौन से दिखते हैं और उनकी पहचान कैसे की जाए।

रीनल सेल कार्सिनोमा क्या है?

रीनल सेल कार्सिनोमा एक प्रकार का किडनी का कैंसर है, जो किडनी की छोटीछोटी नलिकाओं की कोशिकाओं से शुरू होता है। यह वयस्कों में पाया जाने वाला सबसे आम किडनी कैंसर है जिसे Renal Cell Carcinoma भी कहा जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि अब 30 और 40 वर्ष की उम्र के युवा वयस्कों में भी किडनी कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी लेकिन अब कम उम्र में भी युवा इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी के जोखिम कारक तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की क्रॉनिक बीमारी और किडनी कैंसर की फैमिली हिस्ट्री, डायबिटीज और एस्बेस्टस व बेंजीन जैसे रसायनों के संपर्क में आना शामिल है।

रीनल सेल कार्सिनोमा के लक्षण कौनकौन से हैं?

इसके प्रमुख लक्षणों की बात करें तो

  • पेशाब में खून आना
  • कमर या पीठ के एक तरफ दर्द
  • पेट या कमर में गांठ महसूस होना
  • बिना कारण वजन कम होना
  • लगातार थकान
  • बुखार रहना
  • भूख कम लगना

आइए एक्सपर्ट से सीधे समझते हैं किडनी कैंसर के कारण, शुरुआती संकेत और इससे सुरक्षित रहने के कारगर तरीके कौनकौन से हैं।

भारत में किडनी कैंसर तेजी से फैल रहा है और इसके चेतावनी संकेतों के बारे में जागरूकता की कमी अनगिनत लोगों की जान को खतरे में डाल रही है। सबसे महत्वपूर्ण लक्षण जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वह है पेशाब में खून आना। यह कभी दिखाई दे सकता है और कभी केवल जांच में ही पता चलता है। इसके अलावा पसलियों के नीचे लगातार पीठ दर्द, बिना किसी कारण वजन कम होना, अत्यधिक थकान और पैरों में सूजन भी किडनी कैंसर के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कुछ लोग इन लक्षणों को मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी एडवांस स्टेज तक पहुंच जाती है। भारत में हम एक चिंताजनक बदलाव देख रहे हैं, जहां 30 और 40 वर्ष की उम्र के युवा भी किडनी कैंसर का शिकार हो रहे हैं। यह पारंपरिक धारणा के विपरीत है, क्योंकि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी। इस बदलाव को देखते हुए जागरूकता अभियान और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का दायरा बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

किडनी कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

डॉ. रेड्डी के अनुसार, किडनी कैंसर की रोकथाम के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाना जरूरी है जैसे

  • ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल में रखें। शुगर और बीपी कंट्रोल के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करें। बॉडी को एक्टिव रखें तो इस परेशानी से काफी हद तक बचाव कर सकते हैं।  
  • तंबाकू और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
  • एस्बेस्टस और बेंजीन जैसे औद्योगिक रसायनों के संपर्क को सीमित करें।
  • फलों और सब्जियों से भरपूर संतुलित डाइट का सेवन करें।
  • नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां और व्यायाम करें।
  • यदि परिवार में किडनी कैंसर का इतिहास है या कई जोखिम कारक मौजूद हैं, तो 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित जांच कराएं।

अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांचों के माध्यम से किडनी कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। इससे बीमारी के फैलने से पहले उपचार शुरू किया जा सकता है और मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट ने बताया बीमारी के हल्के लक्षण दिखने पर ही तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग ही इस बढ़ते खतरे से लड़ने के सबसे प्रभावी हथियार हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता, शैक्षणिक उद्देश्यों और ‘वर्ल्ड किडनी कैंसर डे’ के उपलक्ष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। लेख में रीनल ट्रांसप्लांट एवं यूरोऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ द्वारा साझा किए गए विचार और GLOBOCAN के आंकड़े उनके चिकित्सकीय अनुभव व उपलब्ध शोध पर आधारित हैं। कैंसर या किडनी से जुड़ा कोई भी लक्षण जैसे पेशाब में खून आना या पेट में गांठ दिखने पर इसे मामूली समस्या न समझें और तुरंत किसी प्रमाणित यूरोऑन्कोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श लें। किसी भी जानकारी को सीधे तौर पर व्यावसायिक चिकित्सा उपचार या जांच का विकल्प न मानें।