Quick Samachar: बच्चों को अच्छा इंसान बनने, दूसरों की मदद करने और सभी के साथ विनम्र व्यवहार करने की सीख दी जाती है। लेकिन आज के समय में सिर्फ दयालु और मददगार होना ही काफी नहीं है। बच्चों को यह भी समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति की नीयत अच्छी नहीं होती। आज के समय में यह भी जरूरी है कि बच्चे सही और गलत प्रभाव के बीच अंतर करना सीखें। कई बार लोग अपनी बात मनवाने या फायदा उठाने के लिए भावनात्मक दबाव बनाते हैं, जिसे मैनिपुलेशन कहा जाता है।

मैनिपुलेशन हमेशा साफ तौर पर दिखाई नहीं देता। यह दोस्ती, प्यार, चिंता या अपराधबोध के रूप में भी सामने आ सकता है। इसलिए मातापिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को कम उम्र से ही ऐसे व्यवहार को पहचानना सिखाएं। आइए जानते हैं वे 5 महत्वपूर्ण लाइफ स्किल्स, जो बच्चों को मैनिपुलेशन से बचाने में मदद कर सकती हैं।

जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव खतरे की घंटी हो सकता है

मैनिपुलेट करने वाले लोग अक्सर बच्चों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बनाते हैं। वे कह सकते हैं, ‘अभी तय करो’ या ‘ज्यादा मत सोचो’। ऐसे में बच्चे बिना सोचेसमझे निर्णय ले सकते हैं। बच्चों को सिखाएं कि किसी भी महत्वपूर्ण बात पर सोचने के लिए समय लेना उनका अधिकार है। उन्हें आत्मविश्वास के साथ कहना आना चाहिए, ‘मुझे इस बारे में सोचने के लिए थोड़ा समय चाहिए।’

शब्दों से ज्यादा अपनी भावनाओं पर ध्यान दें

कई बार सामने वाले के शब्द सामान्य लग सकते हैं, लेकिन उनकी बात सुनकर बच्चे असहज, दबाव में या भ्रमित महसूस कर सकते हैं। यह एक संकेत हो सकता है कि कुछ गलत है। बच्चों को समझाएं कि अगर किसी की बात से उन्हें बारबार गिल्ट महसूस हो रहा है या वे अपनी इच्छा के खिलाफ कुछ करने को मजबूर महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

दयालु होना और हर बात मान लेना अलगअलग बातें हैं

दयालुता एक अच्छी आदत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे हर किसी की बात मान लें। कई लोग बच्चों की अच्छाई का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि कोई कहे, ‘तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते?’ तो बच्चे खुद को दोषी महसूस कर सकते हैं। उन्हें सिखाएं कि दूसरों की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन अपनी सीमाएं तय करना भी उतना ही जरूरी है।

साफ और आत्मविश्वास से ‘ना’ कहना सीखें

कई बच्चों को ‘ना’ कहने में झिझक होती है। उन्हें लगता है कि इससे सामने वाला नाराज हो जाएगा या उन्हें बुरा समझेगा। मातापिता बच्चों को सिखाएं कि हर बार लंबी सफाई देना जरूरी नहीं होता। एक स्पष्ट और सम्मानजनक ‘नहीं, मैं यह नहीं करना चाहता या चाहती’ भी पर्याप्त है। मजबूत सीमाएं बनाना बच्चों को भविष्य में कई मुश्किल परिस्थितियों से बचा सकता है।

किसी को निराश करना और किसी को नुकसान पहुंचाना एक जैसी बात नहीं है

अक्सर बच्चे किसी को दुखी या नाराज नहीं करना चाहते, इसलिए अपनी इच्छा के खिलाफ भी हां कह देते हैं। मैनिपुलेट करने वाले लोग ऐसी बातों का फायदा उठाते हैं और कहते हैं, ‘अगर तुम सच में मेरी परवाह करते हो, तो यह काम करोगे।’ बच्चों को समझाएं कि अपनी सुरक्षा, आराम और मूल्यों के अनुसार निर्णय लेना गलत नहीं है। अगर किसी को उनका फैसला पसंद नहीं आता, तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने उस व्यक्ति को नुकसान पहुंचाया है।

स्वस्थ रिश्तों की पहचान करना भी है जरूरी

बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि स्वस्थ और अच्छे रिश्ते सम्मान, विश्वास और समझ पर आधारित होते हैं। एक सच्चा दोस्त या भरोसेमंद व्यक्ति कभी भी डर, दबाव, अपराधबोध या भावनात्मक ब्लैकमेल का सहारा नहीं लेता। अच्छे रिश्तों में बच्चों की बात सुनी जाती है, उनकी सीमाओं का सम्मान किया जाता है और उनके ‘ना’ को स्वीकार किया जाता है। जब बच्चे सम्मानजनक रिश्तों की पहचान करना सीख जाते हैं, तो वे भविष्य में भी गलत प्रभाव और मैनिपुलेशन से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।