Quick Samachar: भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के इस मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। अक्सर लोग गर्मियों में केवल पानी या नींबू पानी पीने पर ध्यान देते हैं, लेकिन इस दौरान पसीने के जरिए शरीर से जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मियों में शरीर में ‘पोटैशियम’ का स्तर कम होना एक आम लेकिन बेहद गंभीर समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोकैलिमिया कहा जाता है।
मारेंगो एशिया हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में वरिष्ठ सलाहकार एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मित्तल ने बताया पोटैशियम हमारे दिल की धड़कन, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदार होता है। गर्मी में खराब डाइट और बिगड़ते लाइफस्टाइल की वजह से बॉडी में पोटैशियम की कमी हो सकती है। अब सवाल ये उठता है कि बॉडी में पोटैशियम की कमी किन लोगों को होती है और इसकी कमी के बॉडी में कौनकौन से लक्षण दिखते हैं और इसकी भरपाई कैसे की जा सकती है।
पोटैशियम का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए?
पोटैशियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है, जो मांसपेशियों, नसों और हृदय के सही कामकाज में अहम भूमिका निभाता है। खून में पोटैशियम का सामान्य स्तर 3.5 से 5.0 mEq/L के बीच माना जाता है। यदि यह स्तर 3.5 mEq/L से नीचे चला जाता है, तो इसे हाइपोकैलीमिया कहा जाता है। वहीं, पोटैशियम का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाना भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे हृदय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसलिए शरीर में पोटैशियम का संतुलित स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है।
गर्मियों में पोटैशियम की कमी किन लोगों में ज्यादा हो सकती है?
गर्मी में पोटैशियम की कमी अत्यधिक पसीना आने से हो सकती है। यह समस्या खासकर उन लोगों में अधिक देखी जाती है
- जो लोग बहुत अधिक व्यायाम करते हैं या एथलीट हैं।
- 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग।
- जिन्हें पहले से किडनी या हृदय संबंधी बीमारी है।
- जिन्हें उल्टी, दस्त या फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो।
- जो बहुत अधिक मात्रा में केवल सादा पानी पीते हैं और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति नहीं करते।
- कुछ लोग खास दवाइयां जैसे मूत्रवर्धक , स्टेरॉयड या इंसुलिन, जिनमें पोटैशियम का स्तर कम हो सकता है।
पोटैशियम की कमी के लक्षण क्या हैं?
- गर्मी में कब्ज होना
- कमजोरी होना
- थकान और सुस्ती
- पैरों में ऐंठन
- चक्कर आना
- दिल की धड़कन तेज होना
- हाथपैरों में झुनझुनी या सनसनाहट
- बेचैनी
गंभीर मामलों में हाइपोकॅलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस हो सकता है, जिसमें अचानक पैरों में लकवा जैसा महसूस होने लगता है। यदि स्थिति बहुत गंभीर हो जाए तो सांस लेने वाली मांसपेशियां और दिल की सेहत भी प्रभावित हो सकती हैं।
पोटैशियम बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?
अगर गर्मी में आप बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखना चाहते हैं और पोटैशियम से भरपूर फूड खाना चाहते हैं तो आप केला, नारियल पानी, संतरा, मौसमी, एवोकाडो, पालक और दूसरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर सकते हैं। आप बॉडी में पोटैशियम की कमी को पूरा करने के लिए ताजे फल और उसके जूस का सेवन करें।
गर्मियों में कौन से ड्रिंक करेंगे पोटैशियम की कमी पूरी?
- लस्सी
- नींबू पानी
- ताजे फलों का रस
- नारियल पानी
- ये सभी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
डॉक्टर की सलाह: गर्मियों में पर्याप्त तरल पदार्थ और पोटैशियम युक्त आहार लेने से शरीर में पोटैशियम की कमी और उससे जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और स्वास्थ्य सलाह पूरी तरह से चिकित्सा विशेषज्ञों के इनपुट्स और सामान्य स्वास्थ्य मान्यताओं पर आधारित है। यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी तरह के पेशेवर चिकित्सा निदान, डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह या सटीक इलाज का विकल्प न माना जाए। यदि आप अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में लगातार ऐंठन या दिल की धड़कन तेज होने जैसे गंभीर लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो तुरंत किसी योग्य डॉक्टर या नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। शरीर में किसी भी तरह के सप्लीमेंट या आहार बदलाव को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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