Quick Samachar: साल 2006 तक सैफ अली खान को ज्यादातर लोग रोमांटिक और अर्बन हीरो के तौर पर जानते थे। ‘दिल चाहता है’, ‘कल हो ना हो’ और ‘हम तुम’ जैसी फिल्मों ने उनकी एक ऐसी छवि बनाई थी। जो स्टाइलिश, आकर्षक और हल्केफुल्के किरदारों से जुड़ी हुई थी। दर्शकों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे अभिनेता की थी, जो रोमांस और कॉमेडी में सहज नजर आता है। शायद यही वजह थी कि जब विशाल भारद्वाज ने शेक्सपियर के ओथेलो पर आधारित अपनी फिल्म ‘ओमकारा’ में उन्हें ‘लंगड़ा त्यागी’ जैसा देहाती, धूर्त और खतरनाक किरदार सौंपा, तो इंडस्ट्री के कई लोगों ने इस फैसले पर हैरानी जताई।

न कोई बड़ी एंट्री, न हीरो जैसी चमक, फिर भी ‘लंगड़ा त्यागी’ बन ‘ओमकारा’ में छा गए थे सैफ अली खान​
न कोई बड़ी एंट्री, न हीरो जैसी चमक, फिर भी ‘लंगड़ा त्यागी’ बन ‘ओमकारा’ में छा गए थे सैफ अली खान​

किसी को भरोसा नहीं था कि सैफ अपनी स्थापित इमेज से इतना बड़ा छलांग लगा पाएंगे। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद सारी शंकाएं खत्म हो गईं। सैफ ने ‘लंगड़ा त्यागी’ को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे इस तरह जिया कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया। दिलचस्प बात यह रही कि मल्टीस्टारर फिल्म में अजय देवगन जैसे दमदार अभिनेता की मौजूदगी के बावजूद सबसे ज्यादा चर्चा सैफ के किरदार की हुई। चलिए आज उन्हीं के किरदार के बारे में आपको बताते हैं।

लुक जिसने सैफ को पहचानना मुश्किल कर दिया

‘लंगड़ा त्यागी’ का सबसे बड़ा आकर्षण उसका लुक था। हल्की दाढ़ी, छोटे बाल, सांवला मेकअप, देहाती कपड़े और आंखों में छिपी चालाकी, यह सब देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह वही सैफ अली खान हैं जो कुछ समय पहले रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों में नजर आए थे। सैफ ने इस किरदार के लिए अपने ग्लैमरस स्टार इमेज को पूरी तरह छोड़ दिया।

उन्होंने अपने बोलने के तरीके पर काम किया, उत्तर प्रदेश की स्थानीय बोली सीखी और शरीर की भाषा तक बदल दी। फिल्म में उनका लंगड़ाकर चलना केवल शारीरिक विशेषता नहीं था, बल्कि किरदार की पहचान बन गया। हर बार जब वह स्क्रीन पर दिखाई देते, दर्शकों को लगता कि कुछ बड़ा होने वाला है।

अभिनय नहीं किरदार को जिया

‘लंगड़ा त्यागी’ की सबसे बड़ी ताकत उसका मनोविज्ञान था। वह खुलकर बुरा नहीं बनता। वह मुस्कुराता है, दोस्ती निभाने का दिखावा करता है और धीरेधीरे अपने आसपास के लोगों को अपने जाल में फंसाता है। सैफ अली खान ने इस जटिलता को बेहद बारीकी से निभाया। उनके चेहरे के भाव, आंखों की हरकत और संवाद बोलने का तरीका किरदार को खतरनाक बनाता है।

फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जहां वह केवल कुछ शब्द बोलते हैं, लेकिन उनका असर पूरे घटनाक्रम को बदल देता है। यही वजह थी कि दर्शक उनसे नफरत भी करते थे और उनके अभिनय की तारीफ भी। एक सफल खलनायक वही होता है जो दर्शकों के मन में भावनाएं पैदा कर दे। लंगड़ा त्यागी ने यह काम बखूबी किया।

अजय देवगन और करीना के बीच भी छा गए सैफ

‘ओमकारा’ में अजय देवगन, करीना कपूर, कोंकणा सेन शर्मा, विवेक ओबेरॉय और बिपाशा बसु जैसे कलाकार थे। हर अभिनेता ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन फिल्म के बाद जिस किरदार की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वह ‘लंगड़ा त्यागी’ था। यह किसी भी अभिनेता के लिए बड़ी उपलब्धि होती है कि वह इतने कलाकारों के बीच भी अलग नजर आए।

सैफ ने यही कर दिखाया। उनकी मौजूदगी इतनी प्रभावशाली थी कि कई समीक्षकों ने उन्हें फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ बताया। कई लोगों का मानना था कि अगर लंगड़ा त्यागी का किरदार कमजोर पड़ जाता, तो ‘ओमकारा’ का असर भी वैसा नहीं रहता।

क्यों अमर हो गया लंगड़ा त्यागी?

हमें लगता है कि ‘लंगड़ा त्यागी’ सिर्फ इसलिए यादगार नहीं बना क्योंकि वह खलनायक था। वह इसलिए अमर हुआ क्योंकि उसमें इंसानी कमजोरियां थीं। ईर्ष्या, महत्वाकांक्षा, असुरक्षा और बदले की भावना। दर्शक उसके अपराधों से नफरत करते हैं, लेकिन उसके मनोविज्ञान को समझ भी पाते हैं।

सैफ अली खान ने इस किरदार को केवल निभाया नहीं, बल्कि उसमें जान डाल दी। यही कारण है कि ‘ओमकारा’ को रिलीज हुए दो दशक होने को हैं, लेकिन ‘लंगड़ा त्यागी’ आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली किरदारों में गिना जाता है।