
कानपुर। अगर आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से एक साथ जूझ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खतरनाक कॉम्बिनेशन हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का जोखिम 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। कई मामलों में मरीज सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचने के बावजूद जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान में रोज पहुंच रहे हजार मरीज
रावतपुर स्थित एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1,000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से पीड़ित मरीजों की है। संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि हर 100 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों में से 50 से 60 फीसदी में हृदय रोग की समस्या पाई जा रही है।
कैसे बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?
डॉ. शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत कमजोर होने लगती है। इससे धमनियों में वसा जमा होती है और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में हृदय को सामान्य से अधिक दबाव के साथ रक्त पंप करना पड़ता है। इससे धमनियां कठोर होने लगती हैं और हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
मोटापा भी बना बड़ा जोखिम
संस्थान के अनुसार, 30 से 40 फीसदी मोटापे से ग्रस्त मरीजों में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे हृदय रोग का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि समयसमय पर स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान और हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है। साथ ही अनावश्यक तनाव से बचना भी दिल को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए डॉक्टरों की सलाह
- तनाव से दूर रहें और मानसिक संतुलन बनाए रखें।
- भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें।
- नमक और चीनी का सेवन सीमित रखें।
- रोज कम से कम 30 मिनट या सप्ताह में 150 मिनट पैदल चलें।
- वजन नियंत्रित रखने के लिए योग या हल्की एक्सरसाइज करें।
- पर्याप्त और नियमित नींद लें।
- जरूरत से ज्यादा भारी व्यायाम से बचें।
- सकारात्मक और खुशहाल माहौल में रहने की कोशिश करें।