PNB Fake Currency Case: 17.29 करोड़ की नकली करेंसी का राज खुलेगा? NIA ने फरार बैंक मैनेजर को दबोचा​

PNB Fake Currency Case: 17.29 करोड़ की नकली करेंसी का राज खुलेगा? NIA ने फरार बैंक मैनेजर को दबोचा​

PNB Fake Currency Case: पंजाब नेशनल बैंक की सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है. मामले में फरार चल रहे बैंक अधिकारी अमित कुमार को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है. अमित कुमार इस मामले में दर्ज FIR में नामजद तीन बैंक अधिकारियों में शामिल है.

उसकी गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल नकली नोटों के स्रोत और करेंसी चेस्ट तक उनकी पहुंच का है. NIA यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में बैंक के अंदर और बाहर कौनकौन लोग जुड़े हुए थे.मामला सामने आने के बाद PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से सदर बाजार थाने में शिकायत दी गई थी.

FIR में तीन बैंक अधिकारी किए गए थे नामजद

इसके आधार पर 29 अगस्त 2026 को FIR संख्या 0431/2026 दर्ज की गई. FIR में तीन बैंक अधिकारियों को नामजद किया गया था. इनमें रवि कुमार कांसे, जो PNB के मंडल कार्यालय में वरिष्ठ प्रबंधक हैं, सुशील शर्मा, जो सहारनपुर की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक रहे हैं और अमित कुमार, जो हरियाणा के यमुनानगरजगाधरी स्थित खेड़ा बाजार करेंसी चेस्ट के प्रबंधक थे, शामिल हैं.

शुरुआती जांच में तीनों की भूमिका सामने आने के बाद बैंक ने उन्हें निलंबित कर दिया था. जांच के घेरे में आए अमित कुमार उस समय PNB में करेंसी चेस्ट मैनेजर और ज्वाइंट कस्टोडियन के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकदी के रखरखाव और उसकी सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों में कस्टोडियन की भूमिका अहम होती है.

अमित कुमार से अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद

यही वजह है कि 17.29 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोटों की बरामदगी के मामले में अमित कुमार की भूमिका जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वह मामला सामने आने के बाद से फरार था और अब NIA की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है. PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोटों का मामला 29 अगस्त को सामने आया.

सदर बाजार थाना पुलिस को करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा होने की जानकारी मिली. इसके बाद बैंक स्तर पर भी जांच शुरू हुई और करेंसी की गिनती तथा सत्यापन का काम आगे बढ़ाया गया. शुरुआती जांच में नकली नोटों की कीमत करीब 7.40 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन जैसेजैसे करेंसी का ऑडिट और सत्यापन आगे बढ़ा, नकली नोटों की कुल फेस वैल्यू बढ़कर 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

अब जांच एजेंसियां क्या पता लगाने में जुटीं?

जांच में यह आशंका भी सामने आई कि करेंसी चेस्ट में असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए होंगे. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली रकम कहां गई और नकली नोट करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे. मामला सामने आने के बाद सहारनपुर पुलिस ने जांच शुरू की. पुलिस की SIT ने करेंसी चेस्ट के CCTV फुटेज, बैंक के रिकॉर्ड, डिजिटल लेनदेन और संबंधित कर्मचारियों की गतिविधियों की जांच की. बैंक स्तर पर भी विभागीय जांच शुरू की गई थी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच NIA को सौंपी गई. NIA ने 3 सितंबर 2026 को इस मामले को RC02/2026/NIA/LKW के रूप में दोबारा दर्ज कर जांच अपने स्तर पर शुरू की. NIA के मुताबिक शुरुआती पुलिस केस 29 अगस्त को सदर बाजार थाने में BNS की धारा 178 के तहत दर्ज हुआ था. अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है.

क्या संगठित नेटवर्क के जरिए बैंकिंग सिस्टम में आए नकली नोट?

NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर आए कहां से. क्या इन्हें किसी संगठित नेटवर्क के जरिए तैयार कर बैंकिंग सिस्टम में पहुंचाया गया या फिर करेंसी चेस्ट के स्तर पर ही असली और नकली नोटों की अदलाबदली की गई? इसके साथ ही जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि नकली नोटों के बदले कथित तौर पर निकाली गई असली करेंसी कहां गई. बैंक अधिकारियों की भूमिका क्या थी, करेंसी चेस्ट तक किसकिस कर्मचारी की पहुंच थी और इस पूरी प्रक्रिया में कोई बाहरी व्यक्ति या नेटवर्क शामिल था या नहीं. इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

NIA की ओर से क्या कहा गया है?

FIR में नामजद रवि कुमार कांसे और सुशील शर्मा की भूमिका भी जांच के केंद्र में है. दोनों की तलाश जारी है. जांच एजेंसी अब गिरफ्तार अमित कुमार से पूछताछ के आधार पर मामले की आगे की कड़ियां जोड़ने की कोशिश करेगी. NIA ने कहा है कि जांच अभी जारी है. एजेंसी का मकसद पूरी साजिश का खुलासा करना, अन्य आरोपियों की भूमिका सामने लाना और नकली करेंसी के स्रोत तथा उसके संभावित नेटवर्क का पता लगाना है. अमित कुमार की गिरफ्तारी को इसी जांच में एक अहम कड़ी माना जा रहा है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है? अमित कुमार से पूछताछ के बाद इस मामले में कई और परतें खुलने की उम्मीद है.

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