Quick Samachar: Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी और चोरी के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। छह दिनों तक चली गहन जांच के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम आज यानी 20 जून शनिवार को लखनऊ लौट रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। इसी बीच मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर कार्रवाई की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि दोनों को उनके पदों से हटाया जा सकता है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: 45 दिन का ही CCTV  बैकअप, SIT की जांच अंतिम चरण में, 150 संदिग्धों के नाम, 25 पर हो सकती है कार्रवाई,​

बैंक कर्मियों की भूमिका पर उठे सवाल

राम मंदिर की दान राशि में कथित हेरफेर की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, वैसेवैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि चढ़ावे की गिनती और जमा करने की पूरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि निर्धारित सुरक्षा और पारदर्शिता मानकों का महज 10 प्रतिशत तक ही पालन किया गया था। जांच में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, दान राशि की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में बैंक कर्मियों की अहम जिम्मेदारी थी, लेकिन कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं। एसआईटी को कुछ ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं, जो बैंक कर्मचारियों की लापरवाही और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा भी अपने एक साक्षात्कार में बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका मानना था कि इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और निगरानी के कड़े इंतजाम होने चाहिए थे। हालांकि जांच से जुड़े सूत्र यह भी बताते हैं कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों का प्रभाव इतना अधिक था कि बैंक अधिकारी और कर्मचारी उनके निर्देशों पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं थे। कई बार उन्हें जैसा कहा जाता था, वे वैसा ही करते थे। ट्रस्ट से जुड़े लोगों की पहुंच और प्रभाव को देखते हुए बैंक कर्मी किसी भी निर्णय का विरोध करने से बचते थे।

150 संदिग्धों के नाम, 25 पर हो सकती है कार्रवाई

SIT की जांच में अब तक करीब 150 संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जिन लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, उन्हें फिलहाल अयोध्या छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाने की चेतावनी भी दी गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए सभी संदिग्धों के बयानों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती बना CCTV फुटेज

राम मंदिर चढ़ावा  चोरी मामले की जांच में सबसे बड़ी मुश्किल सबूत जुटाने को लेकर सामने आ रही है। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है। ऐसे में कई वर्षों पुराने रिकॉर्ड हासिल करना लगभग असंभव हो गया है। इतना ही नहीं, जांच के दौरान कुछ फुटेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है। अब SIT फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से डिलीट या क्षतिग्रस्त फुटेज को रिकवर करने का प्रयास करेगी। यही वजह है कि कर्मचारियों और संबंधित लोगों के बयान इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि कुछ कर्मचारियों द्वारा नकदी की गड्डियां अलग रखे जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि पूरे मामले की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव से हुई पूछताछ

शुक्रवार को SIT ने मंदिर परिसर में करीब छह घंटे तक जांच की। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव से अलगअलग पूछताछ की गई।

टीम ने भारतीय स्टेट बैंक के संबंधित अधिकारियों, बैंक मैनेजर और कैशियर से भी जानकारी जुटाई। जांच एजेंसी गोपाल राव के भतीजे आनंद और मंदिर कर्मचारी सोमेश आनंद से भी पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन दोनों उपलब्ध नहीं हो सके। सूत्रों के अनुसार, दोनों के मोबाइल फोन फिलहाल स्विच ऑफ हैं।

अब तक 2 करोड़ रुपये की बरामदगी

चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार या पूछताछ के दायरे में आए लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। ये सभी लोग मंदिर में दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं मंदिर ट्रस्ट कर्मचारी रामशंकर उर्फ टिन्नू के घर से सोना भी बरामद हुआ था। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और उसकी कीमत को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक गलियारों में भी गूंजा मामला

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने 7 जून को दावा किया कि राम मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो अदालत को भी हस्तक्षेप करना चाहिए।

विवाद बढ़ने पर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा था कि अभी तक किसी भी प्रकार की चोरी या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि मामला शांत नहीं हुआ और भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग कर दी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली थी।

करणी सेना ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।

अखिलेश यादव का तंज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती की चेतावनी के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा था कि अब केवल ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ नहीं, बल्कि ‘सोने का सोना और चांदी की चांदी’ भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन, बहुमूल्य धातुओं, आभूषणों और मंदिर को दान में मिली अन्य कीमती वस्तुओं का पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।

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सभी की नजरें SIT रिपोर्ट पर

राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला बेहद संवेदनशील बन गया है। अब सबकी नजरें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

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