Quick Samachar: देशभर में 22 लाख से अधिक छात्र NEET UG 2026 रीएग्जाम दे रहे हैं, लेकिन इस परीक्षा के बीच कोलकाता की एक छात्रा की कहानी सबसे अलग नजर आ रही है. सृष्टि दुबे नाम की इस छात्रा ने ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा दी है, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है. एक गंभीर सड़क हादसे में घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और डॉक्टर बनने के अपने सपने को जिंदा रखा. यही वजह है कि उनकी कहानी अब हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है. परीक्षा के दिन जब वह केंद्र पहुंचीं तो वहां मौजूद लोग भी उनके साहस और दृढ़ संकल्प को देखकर भावुक हो गए.

9 पसलियां टूटीं, फेफड़े घायल और फिर भी नहीं टूटा हौसला! एंबुलेंस के सहारे NEET री-एग्जाम देने पहुंची छात्रा​

सृष्टि दुबे के पिता शीशराम दुबे के अनुसार 14 जून को उनकी बेटी एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी. इस हादसे में उसकी 9 पसलियां टूट गईं और फेफड़ों में भी गंभीर चोट आई. दुर्घटना के बाद उसकी बड़ी सर्जरी करनी पड़ी और कई दिनों तक उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था. हालांकि इलाज के बाद उसकी हालत में धीरेधीरे सुधार होने लगा और डॉक्टरों ने वेंटिलेटर हटा दिया. इसी दौरान सृष्टि ने अपने पिता से कहा कि वह हर हाल में NEET परीक्षा देना चाहती है. बेटी की यह इच्छा सुनकर परिवार ने उसकी मदद के लिए हर संभव कोशिश शुरू कर दी.

पिता ने मंत्री से क्या अपील की थी?
जब सृष्टि ने परीक्षा देने की इच्छा जताई तो उसके पिता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई. उन्होंने बताया कि अस्पताल की ओर से डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध कराने की तैयारी है. पत्र में उन्होंने अनुरोध किया कि उनकी बेटी को परीक्षा देने की अनुमति दी जाए और परीक्षा केंद्र में ग्राउंड फ्लोर पर विशेष व्यवस्था की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि सृष्टि अस्पताल के कपड़ों में परीक्षा देगी और उसे जरूरी मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा हॉल में बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए. यह अपील सोशल मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई.

शिक्षा मंत्री ने कैसे की मदद?
छात्रा के पिता की अपील पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मानवीय आधार पर तुरंत संज्ञान लिया. इसके बाद कोलकाता के ढाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र में सृष्टि के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की गई. इतना ही नहीं, परीक्षा केंद्र के बाहर एंबुलेंस और मेडिकल सपोर्ट टीम भी तैनात की गई ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके. सभी जरूरी इंतजामों के बीच सृष्टि ने परीक्षा दी और अपने हौसले की मिसाल पेश की. परीक्षा शुरू होने के बाद उसके मातापिता ने फोन पर शिक्षा मंत्री का धन्यवाद भी किया. यह कहानी दिखाती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही सहयोग मिलने पर मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी सपनों की राह नहीं रुकती.

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