
डिजिटल डेस्क लखनऊ: करीब 13 साल पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाता था। साल 2013 में अमेरिकी वित्तीय कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने ‘फ्रेजाइल फाइव’ शब्द का इस्तेमाल उन पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया था, जिन्हें बाहरी आर्थिक झटकों के प्रति कमजोर माना जा रहा था। इस सूची में भारत के साथ ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की शामिल थे।
उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। वर्ष 2004 से 2014 तक सत्ता में रही यूपीए सरकार के अंतिम वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आईं। रुपये में गिरावट, महंगाई और विदेशी निवेशकों के भरोसे में कमी जैसे मुद्दे आर्थिक चर्चा के केंद्र में थे।
2012 में BRICS के बीच भारत की रेटिंग पर उठे थे सवाल
भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर वर्ष 2012 में भी गंभीर चिंताएं जताई गई थीं। जून 2012 में स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की एक रिपोर्ट ‘Will India Be the First BRIC Fallen Angel?’ शीर्षक से सामने आई। इसमें आशंका जताई गई थी कि भारत BRICS देशों में ऐसा पहला देश बन सकता है, जिसकी इन्वेस्टमेंट ग्रेड सॉवरेन रेटिंग खत्म हो जाए।
उस समय भारत की रेटिंग BBB बताई गई थी, जिसे इन्वेस्टमेंट ग्रेड की सबसे निचली रेटिंग माना जाता है। एक और गिरावट की स्थिति में भारत के इन्वेस्टमेंट ग्रेड से बाहर होने की आशंका जताई जा रही थी।
BRICS की कमजोर कड़ी बताए जाने लगा था भारत
उस दौर में रुपये की कमजोरी, बढ़ती महंगाई और विदेशी निवेश में कमी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई। आर्थिक सुधारों की धीमी रफ्तार के बीच सरकार पर ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ के आरोप भी लगे।
मशहूर अर्थशास्त्री और Goldman Sachs से जुड़े रहे जिम ओ’नील ने उस दौर में भारत को BRIC देशों का सबसे कम आकर्षक सदस्य बताया था। यही जिम ओ’नील BRIC शब्द के इस्तेमाल के लिए भी जाने जाते हैं।
हालात ऐसे बने कि कुछ चर्चाओं में BRICS में भारत की जगह इंडोनेशिया को शामिल करने की संभावना तक की बात कही जाने लगी थी।
2014 के बाद बदलने लगी आर्थिक तस्वीर
वर्ष 2014 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर में बदलाव दिखाई देने लगा। आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ी और वैश्विक संस्थाओं तथा वित्तीय कंपनियों की भारत को लेकर धारणा में भी बदलाव आया।
वर्ष 2018 में HSBC ने BRIC देशों के बीच भारत को बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश बताते हुए ‘ब्राइट स्पॉट’ के तौर पर पेश किया। भारत को चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा गया।
कोविड जैसी चुनौती भी पार की
भारत के आर्थिक सफर के सामने कोविड19 महामारी जैसी बड़ी चुनौती भी आई। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बावजूद अर्थव्यवस्था ने धीरेधीरे रिकवरी की और विकास की रफ्तार वापस हासिल की।
कॉपी में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष S&P ने भारत की रेटिंग बढ़ाकर BBB कर दी। दावा है कि वर्ष 2012 के बाद यह पहली बार हुआ। इसी महीने जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भी भारत की सॉवरेन रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A कर दी।
आज 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ का दावा
आज BRICS शिखर सम्मेलन के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर वैश्विक चर्चा का केंद्र बदल चुका है। कॉपी में दिए आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 7.8 फीसदी रही।
यानी जिस भारत को करीब 13 साल पहले ‘फ्रेजाइल फाइव’ की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, वही भारत आज वैश्विक आर्थिक ताकत के तौर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘ब्राइट स्पॉट’ तक
भारत की आर्थिक कहानी में पिछले 13 वर्षों में धारणा का बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक दौर में जहां रुपये, महंगाई, निवेश और रेटिंग को लेकर सवाल उठ रहे थे, वहीं आज भारत की विकास दर, बाजार और आर्थिक संभावनाओं पर दुनिया की नजर है।
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। यही बदलाव भारत के आर्थिक सफर को ‘फ्रेजाइल फाइव’ से एक उभरती वैश्विक आर्थिक शक्ति तक पहुंचने की कहानी बनाता है।