Quick Samachar: राम मंदिर में 200 करोड़ के कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच 3 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है. इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. एसआईटी की तरफ से 6 दिनों की जांच में 150 संदिग्धों से पूछताछ की गई.

आरोपियों को सजा दिलवा पाती है यूपी की SIT? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के बीच जानिए ट्रैक रिकॉर्ड​

सभी को अगले आदेश तक अयोध्या छोड़कर कहीं बाहर जाने की अनुमति नहीं है. राम जन्मभूमि के ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्र्स्टी अनिल मिश्रा और मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राव पर भी यही आदेश लागू है.

SIT ने अपनी जांच में 2021 से लेकर अब तक के मंदिर के दानपात्रों की धनराशि का इस्तेमाल से लेकर जमीनों की खरीद तक पर पड़ताल की. राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के साथसाथ बैंक के अधिकारियों से भी पूछताछ की.सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की.

चढ़ावा मिलने से लेकर उसकी गिनती करने के तरीके से लेकर बैंकों में पैसे जमा कराने तक के एकएक बिदुओं की पड़ताल की गई है. संदिग्धों के बैंक खातों में ट्रांजैक्शन की भी जानकारी ली गई है. माना जा रहा है कि एसआईटी द्वारा सीएम योगी को रिपोर्ट सौंपने के बाद राम जन्मभूमि ट्रस्ट कई बड़े पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है.

एसआईटी की जांच में अब तक क्या हुआ है?

1. राम मंदिर चढ़ावा मामले में 6 दिन की जांच में टीम के सामने 150 संदिग्धों के नाम आए. करीब 25 लोगों पर कार्रवाई की संभावना है.

2. चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राय पर एक्शन संभव. इसके अलावा टिन्नू यादव, लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे रडार पर.

3. अब तक 2 करोड़ की धनराशि की बरामदगी. चंपत राय के भतीजे चंदन राय पर भी उठे सवाल. गोपाल राय के करीबी सोमेश आनंद की भूमिका संदिग्ध.

एसआईटी का क्या है सक्सेस रेट?

साल 2023 में योगी सरकार की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया था. इसमें एसआईटी द्वारा इनवेस्टिगेट किए गए मामलों की जानकारी दी गई थी. सरकार द्वारा तब जारी आंकड़ों के मुताबिक 2017 और 2023 के बीच 25 महीनों में 88 मामलों की जांच की गई थी.

वहीं, 2007 और 2016 के बीच 32 महीनों में 47 मामलों की जांच की गई थी. इसी तरह 2017 से 2023 के बीच 28 महीनों में 82 मामलों पर कार्रवाई हुई थी. इन मामलों में शामिल 351 कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए उन पर कार्रवाई की गई थी.

इसके अलावा 1,002 लोगों को इन मामलों में एसआईटी द्वारा सजा दिलाई गई. वहीं, 2007 और 2016 के बीच 31 महीनों में 40 मामलों पर एक्शन हुआ था. फिलहाल, 2023 के बाद एसआईटी को सौंपे गए केसेज और उसके स्टेटस संबंधित आंकड़े सरकार द्वारा जारी नहीं किए गए.

2017 से 2023 के बीच एसआईटी ने दोगुने मामलों की जांच की

अगर आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2007 और 2016 के बीच के मुकाबले 2017 से 2023 में एसआईटी ने दोगुने मामलों की जांच की. साथ ही इस दौरान पहले से अधिक केसेज पर एक्शन भी सुनिश्चित किया गया. इस दौरान एसआईटी सरकारी विभागों में फर्जी डिग्री, मार्कशीट, भर्ती से जुड़े घोटालों, राजस्व चोरी, स्कॉलरशिप में गड़बड़ी जैसे मामलों को निपटाने में सफल रही . एसआईटी ने अपनी कार्रवाईयों से इस बीच 1,203 करोड़ के राजस्व नुकसान को भी रोका.

एसआईटी के आंकड़े

SIT को ही क्यों सौंपी गई राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच की जिम्मेदारी सीएम योगी द्वारा की किसी और भी जांच एजेंसी को दी जा सकती थी. लेकिन इसे एसआईटी को ही क्यों सौंपा गया. दरअसल, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन ही किसी विशेष, संवेदनशील या हाईप्रोफाइल मामले जांच के लिए किया जाता. जब किसी मामले में पुलिस की जांच पर्याप्त नहीं मानी जाती है.

साथ ही उस केस में राजनीतिक या प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जो मामले की जांच को भटका सकते है, तो ऐसी स्थिति में सरकार के सामने एसआईटी इन्वेस्टिगेशन एक मजबूत विकल्प निकल कर आता है.

ऐसा माना जाता है कि एसआईटी की रिपोर्ट ना केवल निष्पक्ष होगी, बल्कि उसमें वो पहलू कवर किए जा सकेंगे, जो जांच एजेसियों की जांच में सामने नहीं आ पाती है. यही वजह है सरकार की तरफ से राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर मामले की जिम्मेदारी भी एसआईटी को दी गई.

कई मामलों में एसआईटी का गठन कोर्ट द्वारा भी किया जाता है. लेकिन राज्य सरकारों के पास भी गंभीर मामलों में एसआईटी के गठन का अधिकार है. जरूरत के हिसाब से किसी भी मामले की जांच के लिए एसआईटी में एक से लेकर कई अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जा सकती है.

एसआईटी की जांच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसी के पास नहीं होता है, जिससे टीम के पास मामलों को सुलझाने का सक्सेस रेट कई गुना तक बढ़ जाता है.