Quick Samachar: हमारी स्किन का रंग कैसा है इसमें मेलेनिन का रोल अहम है. ये मेलेनिन हमारी स्किन को यूवी किरणों से बचाता है. इसलिए ऊपर की परत में इसका प्रोडक्शन बिगड़ने लगता है और ये डार्क होने लगती है. इसे आसान भाषा में स्किन टैन पुकारा जाता है. टैनिंग से स्किन को बचाने के लिए सनस्क्रीन जरूरी है. लेकिन ये भी नुकसान का कारण बन सकती है. जानें कैसे…

गलत सनस्क्रीन चुनना अगर सनस्क्रीन को चुनने में अपनी स्किन का टाइप और जरूरत का ध्यान न दिया जाए तो नुकसान भी हो सकता है. लोगों को लगता है कि सनस्क्रीन स्किन को धूप से बचाती है लेकिन ये इसे हेल्दी रखने में भी अहम रोल निभाती है.
मुंहासों का बढ़ना किसी की स्किन का टाइप ऑयली है और वो हैवी या ऑयल बेस्ट सनस्क्रीन लगाता है तो इससे पोर्स बंद हो सकते हैं. ऐसे में पिंपल्स और ब्लैकहेड्स के बढ़ने की प्रॉब्लम हो जाती है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ऑयली स्किन पर जैल बेस्ड सनस्क्रीन लगानी चाहिए.
एलर्जी और जलन खुशबू, अल्कोहल और दूसरे केमिकल होने की वजह से कुछ सनस्क्रीन स्किन में सेंसिटिविटी पैदा कर सकती है. ऐसे में स्किन पर लालपन, खुजली या जलन हो सकती है. इसलिए अपनी स्किन के टाइप का ध्यान रखें और नए प्रोडक्ट को लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें.
टैनिंग का डर क्या आप जानते हैं कि अगर सनस्क्रीन को खरीदते समय इसके एसपीएफ पर फोकस न किया जाए तो सनबर्न या टैनिंग हो सकती है. क्योंकि कम एसपीएफ की वजह से यूवीए/यूवीबी से प्रॉपर सेफ्टी नहीं मिलती. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह पर सही एसपीएफ वाली सनस्क्रीन को ही यूज करें.
ऑयली स्किन का खतरा सनस्क्रीन में एसपीएफ और पीए++++ के अलावा मॉइस्चराइजिंग जैसे कई दूसरी चीजों पर भी फोकस किया जाता है. अगर सही फार्मूले को नहीं चुनते हैं तो ऐसे में स्किन पर ज्यादा ऑयल या चिपचिपापन महसूस हो सकता है. इसलिए गलत फॉर्मूले को चुनने के बजाय पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.
किस सनस्क्रीन को कैसे चुनें एक्सपर्ट बताते हैं कि जिनकी ऑयली स्किन है उन्हें जेल वाली, ड्राई स्किन वालों को ग्लिसरीन, हयालूरोनिक एसिड यानी मॉइस्चराइजिंग गुण वाली, सेंसिटिव स्किन के लिए फ्रेगरेंस फ्रीमिनरल बेस्ड सनस्क्रीन को चुनना चाहिए. इसके अलावा दिन में कम से कम तीन बार सनस्क्रीन लगाएं. घर से बाहर जा रहे हैं तो आधे घंटे पहले सनस्क्रीन लगा लें.
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