रिटायर्ड बैंक मैनेजर की गुमशुदगी ने बढ़ाया रहस्य, एक साल बाद दोबारा खुली जांच तो सामने आए चौंकाने वाले सुराग..

रिटायर्ड बैंक मैनेजर की गुमशुदगी ने बढ़ाया रहस्य, एक साल बाद दोबारा खुली जांच तो सामने आए चौंकाने वाले सुराग..
रिटायर्ड बैंक मैनेजर की गुमशुदगी ने बढ़ाया रहस्य, एक साल बाद दोबारा खुली जांच तो सामने आए चौंकाने वाले सुराग..

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मुंबई में एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर की गुमशुदगी का मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया, जब करीब एक साल तक ठंडे बस्ते में पड़ी जांच फाइल पर पुलिस कमिश्नर की नजर पड़ी। शुरुआती जांच में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बाद मामले को लगभग बंद मान लिया गया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने फाइल का दोबारा अध्ययन किया तो कई सवाल सामने आए।

पुलिस कमिश्नर को जांच में दिखी कमी

अप्रैल 2017 के पहले सप्ताह में तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर उपनगरीय पुलिस थानों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान कांदिवली पश्चिम स्थित चारकोप थाने में दर्ज एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर की गुमशुदगी की फाइल उनके सामने आई।

फाइल का अध्ययन करने पर उन्हें लगा कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और गहराई से नहीं की गई है। इसके बाद उन्होंने यह फाइल तत्कालीन जॉइंट पुलिस कमिश्नर को सौंपते हुए नए सिरे से जांच कराने के निर्देश दिए।

अनुभवी अधिकारी को सौंपी गई जिम्मेदारी

जॉइंट पुलिस कमिश्नर, जो लंबे समय तक मुंबई क्राइम ब्रांच-सीआईडी का नेतृत्व कर चुके थे, ने भी फाइल की समीक्षा के दौरान कई खामियां देखीं। उन्हें यह मामला सामान्य गुमशुदगी से अधिक संदिग्ध लगा। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई और जांच की जिम्मेदारी एक अनुभवी एसीपी को सौंप दी।

विशेष जांच टीम का हुआ गठन

एसीपी के नेतृत्व में थाना मालवणी के तत्कालीन प्रभारी की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और अन्य अनुभवी पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया।

टीम ने पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेज और सभी संभावित सुरागों की दोबारा जांच शुरू की। शुरुआती जांच में जिन पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया गया था, उन्हें फिर से खंगाला गया।

अहमदनगर से शुरू हुई नई पड़ताल

फाइल का गहन अध्ययन करने के बाद जांच टीम ने अपनी पड़ताल की शुरुआत महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की शिवाजी कॉलोनी में रहने वाली एक महिला से जुड़े पहलुओं की जांच से की। पुलिस को शक था कि गुमशुदा बैंक मैनेजर का उससे कोई निजी या वित्तीय संबंध रहा होगा।

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि बैंक मैनेजर और उस महिला के बीच लंबे समय से संपर्क था। मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और कुछ पुराने लेनदेन के सुरागों ने पुलिस का शक और मजबूत कर दिया। इसके बाद टीम ने महिला के आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की।

फोन रिकॉर्ड और पुराने संपर्कों से मिला सुराग

जांच में सामने आया कि गुमशुदा बैंक मैनेजर कई बार अहमदनगर गया था और आखिरी दिनों में भी उसका संपर्क उसी महिला से बना हुआ था। पुलिस को यह भी पता चला कि दोनों के बीच पैसों के लेनदेन और निजी संबंधों को लेकर तनाव चल रहा था।

कुछ गवाहों ने बताया कि घटना से पहले बैंक मैनेजर को महिला के घर के आसपास देखा गया था। इसके बाद पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन, यात्रा रिकॉर्ड और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इन सबने मिलकर यह साफ कर दिया कि वह अपनी मर्जी से कहीं और नहीं गया था, बल्कि उसे किसी योजना के तहत वहां बुलाया गया था।

पूछताछ में खुला पूरा राज

लगातार पूछताछ के बाद महिला और उसके पति के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे। जब पुलिस ने तकनीकी सबूत उनके सामने रखे, तो पूरा मामला खुलने लगा। जांच में सामने आया कि बैंक मैनेजर को अहमदनगर बुलाकर पहले बहस की गई, फिर उस पर हमला किया गया।

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई ताकि मामला गुमशुदगी जैसा ही बना रहे। आरोपियों ने मोबाइल बंद कर दिए, सबूत मिटाने की कोशिश की और पुलिस को गुमराह करने के लिए अलग-अलग कहानियां गढ़ीं। लेकिन तकनीकी जांच और पुराने रिकॉर्ड ने उनकी योजना को बेनकाब कर दिया।

शव के अवशेष और अहम सबूत बरामद

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कुछ अहम सबूत बरामद किए, जिनमें हत्या में इस्तेमाल सामान और शव के अवशेष शामिल थे। फॉरेंसिक जांच से भी यह पुष्टि हुई कि गुमशुदा बैंक मैनेजर की हत्या की गई थी।

इसके बाद पुलिस ने महिला, उसके पति और मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। उन पर हत्या, साजिश रचने और सबूत मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

एक साल बाद सुलझी गुत्थी

करीब एक साल तक अनसुलझी रही इस गुमशुदगी की गुत्थी आखिरकार दोबारा खोली गई जांच के बाद सुलझ गई। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि अगर पुरानी फाइल पर दोबारा ध्यान नहीं दिया जाता, तो यह मामला शायद हमेशा के लिए रहस्य ही बना रहता।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि किसी भी जांच में छोटी-सी चूक भी बड़े सच को लंबे समय तक छिपा सकती है, लेकिन सही दिशा में दोबारा की गई पड़ताल आखिरकार सच्चाई सामने ले ही आती है।

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