India Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिली हरी झंडी, जानिए क्यों मानी जा रही है हरित परिवहन की बड़ी उपलब्धि, देखें Exclusive Photos

India Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिली हरी झंडी, जानिए क्यों मानी जा रही है हरित परिवहन की बड़ी उपलब्धि, देखें Exclusive Photos
India Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिली हरी झंडी, जानिए क्यों मानी जा रही है हरित परिवहन की बड़ी उपलब्धि, देखें Exclusive Photos

डिजिटल डेस्क/नई दिल्ली। भारत ने हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए अपनी पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित यात्री ट्रेन की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींदसोनीपत रेलखंड पर इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस परियोजना को भारतीय रेलवे के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और आत्मनिर्भर तकनीक की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उद्घाटन के बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन की तकनीक और इसकी विशेषताओं की जानकारी साझा की।

पूरी तकनीक भारत में विकसित, आईपी अधिकार भी देश के पास

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पूरी तकनीक का विकास भारत में हुआ है और इसका बौद्धिक संपदा अधिकार भी भारत के पास है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तकनीक का परीक्षण और प्रमाणन विश्व की एक अग्रणी एजेंसी द्वारा किया गया है, जिससे इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

सिर्फ पानी का उत्सर्जन, कई क्षेत्रों में हो सकेगा उपयोग

रेल मंत्री के अनुसार, यह पूरी तरह हरित तकनीक है और इसके संचालन के दौरान केवल पानी का उत्सर्जन होता है।

उन्होंने कहा कि रेलवे में सफलता के बाद इसी तकनीक का उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा। इसमें समुद्री परिवहन, ट्रक, छोटी नावों और मध्यम आकार की मछली पकड़ने वाली नौकाओं जैसे कई अनुप्रयोग शामिल हो सकते हैं।

उनके मुताबिक, स्वदेशी तकनीक विकसित होने से भविष्य में भारत को इस क्षेत्र में अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, भारत के अधिकांश ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क के पहले से विद्युतीकृत होने के कारण इसकी भूमिका कुछ विशेष मार्गों तक सीमित रह सकती है।

 

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भविष्य में हाइड्रोजन आधारित परिवहन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित किफायती हरित हाइड्रोजन कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाती है और यह आर्थिक रूप से कितनी प्रतिस्पर्धी साबित होती है।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?

शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोरा के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम में हाइड्रोजन और हवा से प्राप्त ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के मोटरों को शक्ति प्रदान करती है और ट्रेन को चलाती है।

95% से अधिक नेटवर्क पहले से विद्युतीकृत

नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक मौशुमी मोहंती का कहना है कि भारत के 95 प्रतिशत से अधिक ब्रॉडगेज रेलवे नेटवर्क का पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेनें मुख्यधारा के बजाय विशेष परिस्थितियों और चुनिंदा मार्गों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकती हैं।

89 किलोमीटर का सफर, 12 स्टेशनों पर ठहराव

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलेगी। यह ट्रेन 89 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करेगी और रास्ते में 12 मध्यवर्ती स्टेशनों पर रुकेगी।

 

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