
लखनऊ। पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज गुरुवार सुबह चारबाग दिगंबर जैन मंदिर से मंगल पदविहार करते हुए भव्य शोभायात्रा के साथ आशियाना दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। सुबह करीब 7 बजे मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने जयघोष, पुष्पवर्षा और मंगलगान के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा जैन समाज के सदस्य पदयात्रा में शामिल होकर धार्मिक वातावरण का सृजन करते रहे। मंदिर पहुंचने के बाद विधिविधान से पूजाअर्चना संपन्न हुई और इसके बाद शोभायात्रा धर्मसभा में परिवर्तित हो गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
“समाज का उत्थान संस्कारों से होता है”
धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने कहा, “मैं फसलें नहीं, नस्लों को सुधारने आया हूं; कच्चों को पकाने और पके को बचाने आया हूं।” उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और आध्यात्मिक जागरण से होती है। यदि नई पीढ़ी में संयम, सदाचार और नैतिक मूल्यों का विकास हो जाए तो समाज स्वत मजबूत और संस्कारित बन सकता है।
19 जुलाई से लखनऊ में ऐतिहासिक चातुर्मास
उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज का वर्ष 2026 का चातुर्मास इस वर्ष लखनऊ में आयोजित होगा। इसकी चातुर्मास स्थापना 19 जुलाई 2026 को सीएमएस ऑडिटोरियम, सीएमएस कानपुर रोड परिसर में होगी।
आयोजकों के अनुसार इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, धर्मप्रेमी और जैन समाज के सदस्य लखनऊ पहुंचेंगे।
धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान
प्रेसवार्ता के दौरान जानकारी दी गई कि उपाध्याय श्री के सान्निध्य में अब तक—
80 जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार
54 पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव
380 वेदी प्रतिष्ठाएं
95 शिखर निर्माण
780 शिखर कलशारोहण
47 नए जिन मंदिरों का निर्माण
13 चौबीसी एवं मानस्तंभ/कीर्तिस्तंभ
185 संत भवन
59 सिद्धचक्र महामंडल विधान
6 अस्पताल
7 जैन विद्यालय
3 भोजनशालाओं का संचालन
जैसे अनेक धार्मिक एवं सामाजिक कार्य संपन्न किए गए हैं।
बताया गया कि पिछले 26 वर्षों में उन्होंने लगभग 90,000 किलोमीटर का पदविहार कर धर्म प्रचारप्रसार किया है।
कठोर तप और त्याग के लिए हैं प्रसिद्ध
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि उपाध्याय श्री अपने संयम, तप, त्याग, ध्यान साधना और वचनसिद्धि के लिए देशभर में विशेष पहचान रखते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर जीर्णोद्धार के प्रत्येक संकल्प के साथ वे किसी एक वस्तु का त्याग करते हैं और कार्य पूर्ण होने के बाद उसे जीवनभर के लिए छोड़ देते हैं। उन्होंने अनेक वस्तुओं के साथ सभी प्रकार की औषधियों का भी त्याग किया है।
चातुर्मास के प्रमुख कार्यक्रम
आयोजकों के अनुसार चातुर्मास के दौरान धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।
प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं—
19 जुलाई चातुर्मास कलश स्थापना
20 जुलाई ज्योतिष सम्मेलन
28 जुलाई चातुर्मास प्रतिष्ठापन विधि
29 जुलाई गुरु पूर्णिमा महोत्सव
12 अगस्त 43वां जन्मोत्सव एवं भंडारा
15 अगस्त राष्ट्र के नाम संदेश
19 अगस्त भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष सप्तमी एवं सम्मेद शिखर रचना
28 अगस्त वात्सल्य पर्व एवं रक्षाबंधन विशेष प्रवचन
4 सितंबर जन्माष्टमी विशेष आयोजन