
बरेली, अमृत विचार। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अस्थि रोग विभाग में आयोजित डॉ. वरुण एडवांस्ड एंडोस्पाइन कोर्स2026 में आधुनिक एंडोस्कोपिक और परक्यूटेनियस स्पाइन सर्जरी की नवीनतम तकनीकों पर विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत होने वाली स्पाइन सर्जरी को बुजुर्ग, कमजोर और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी बताया गया।
रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग द्वारा एडवांस्ड एंडो स्पाइन कोर्स 2026 दो दिवसीय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्टीय शैक्षणिक कार्यक्रम गुरुवार को आयोजित किया जाएगा। जिसमें पहले दिन गुरुवार को अमेरिका के विश्वविख्यात स्पाइन सर्जर डा. हामीद अब्बासी, डा. वरुण अग्रवाल समेत देश विदेश के अनेक विशेषज्ञ स्पाइन सर्जन ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारत में पहली बार इस अत्याधुनिक एसआई जॉइंट फ्यूजन एवं ओब्लिक लेटरल लम्बर इंटरबॉडी फ्यूजन तकनीकों की लाइव सर्जरी का प्रदर्शन किया किया। इसके साथ ही कैडेवर हैंड्सऑन वर्कशॉप , वैज्ञानिक व्याख्यान और आधुनिक स्पाइन सर्जरी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व न्यूनतम चीरा , एंडोस्कोपिक और रोबोटिक स्पाइन सर्जरी विशेषज्ञ प्रो. वरुण अग्रवाल ने किया। देशभर से आए प्रतिनिधियों को आधुनिक एंडोस्कोपिक एवं परक्यूटेनियस स्पाइन सर्जरी की तकनीकों पर व्याख्यान, लाइव सर्जरी और हैंड्सऑन प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय या अवेक एनेस्थीसिया के तहत की जाने वाली परक्यूटेनियस स्पाइन सर्जरी बुजुर्ग, कमजोर और ऐसे हृदय रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है, जो लंबे समय तक सामान्य एनेस्थीसिया लेने के लिए उपयुक्त नहीं होते। इन तकनीकों से मरीजों में ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं का जोखिम कम होता है और वे अपेक्षाकृत जल्दी स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा सकते हैं।
जॉइंट से जुड़े दर्द की वैज्ञानिक जांच और पहचान की प्रक्रिया पर दी जानकारी
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सैक्रोइलिएक जॉइंट को लगातार रहने वाले कमर दर्द के महत्वपूर्ण, लेकिन अक्सर अनदेखे कारण के रूप में रेखांकित किया जाना रहा। अमेरिका से आए डॉ. हामिद अब्बासी ने एसआई जॉइंट से जुड़े दर्द की वैज्ञानिक जांच और पहचान की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, गंभीर और लंबे समय से दर्द से पीड़ित चुनिंदा मरीजों के लिए न्यूनतम चीरे से की जाने वाली एसआई जॉइंट फ्यूजन की नई तकनीक का भी प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का कहना था कि आधुनिक एंडोस्कोपिक और परक्यूटेनियस तकनीकों के बढ़ते उपयोग से स्पाइन सर्जरी अधिक सुरक्षित, कम दर्दनाक और मरीजों के लिए सुविधाजनक बन रही है। पटना से आए स्पाइन सर्जन डा. आनंद भूषण ने बताया कि डा. वरुण अग्रवाल के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पाइन सर्जरी चीरा नहीं लगाकर दूरबीन से करने पर जानकारी दी।
डा. हामीद अब्बासी को पौधे और प्रतीक चिन्ह देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम शुभारंभ के मौके पर बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डा. केशव अग्रवाल, कुलपति डॉ. लता अग्रवाल, प्राधिकुलाधिपति डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल, प्रति उप कुलाधिपति डॉ. किरण अग्रवाल, डा. वरुण अग्रवाल, रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रधानाचार्य डॉ. रजनीश पठानिया, प्रोफेसर, डा. मदन मोहन नागर ने दीप प्रवज्लित करके एडवांस्ड एंडो स्पाइन कोर्स का शुभारंभ किया। उसके बाद डा. केशव अग्रवाल और डा. अशोक अग्रवाल ने अमेरिका के विश्वविख्यात स्पाइन सर्जर डा. हामीद अब्बासी को पौधे और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।