राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने मांगा और समय, शुद्धिकरण अनुष्ठान से ट्रस्ट ने जताया प्रायश्चित

राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने मांगा और समय, शुद्धिकरण अनुष्ठान से ट्रस्ट ने जताया प्रायश्चित
राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने मांगा और समय, शुद्धिकरण अनुष्ठान से ट्रस्ट ने जताया प्रायश्चित

लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच अब भी जारी है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। वहीं, दूसरी ओर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस घटना के बाद मंदिर की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से 10 दिवसीय शुद्धिकरण एवं प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू किया है।

एसआईटी ने जांच पूरी करने के लिए मांगा अतिरिक्त समय

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने शासन से जांच अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी सोमवार को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में अपनी अंतरिम स्थिति रिपोर्ट सीधे न्यायालय में प्रस्तुत कर सकती है। इसके साथ ही अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए एसआईटी को और समय दिए जाने की मांग की जाएगी। जांच दल का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कई पहलुओं की गहन जांच अभी बाकी है।

13 जून को हुआ था एसआईटी का गठन

राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। एसआईटी में पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को सदस्य बनाया गया है। यह जांच समिति श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित की गई थी। शुरुआत में एसआईटी को 15 दिन में जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया था, जिसे बाद में 15 दिन के लिए बढ़ाया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच की समय सीमा को 15 जुलाई तक बढ़ाने की अनुमति दी थी।

अंतरिम रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

एसआईटी ने 23 जून को अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को नौ पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित रूप से गबन किए गए करीब 80 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। हालांकि, मामले में वास्तविक गड़बड़ी की पूरी राशि और इसके पीछे की प्रक्रिया की जांच अभी जारी है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने छोड़े पद

चढ़ावा विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है और दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

राम मंदिर में शुरू हुआ 10 दिवसीय शुद्धिकरण अनुष्ठान

इधर, अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कथित चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर परिसर में 10 दिवसीय शुद्धिकरण अनुष्ठान शुरू किया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की परिकल्पना पर आधारित इस अनुष्ठान में विभिन्न गुरुकुलों के माध्यम से विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जा रहा है।

‘त्रुटियों के परिमार्जन’ के लिए हो रहा पाठ

गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह प्रायश्चित अनुष्ठान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का अधिक से अधिक पाठ कराने का प्रयास किया जा रहा है। ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास के अनुसार, रामलला के स्थान पर हुई कथित त्रुटियों के परिमार्जन के उद्देश्य से यह धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही वाल्मीकि रामायण का पाठ भी कराया जा रहा है।

‘घटना से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं’

गोविंद देव गिरि ने इससे पहले कहा था कि चढ़ावा चोरी की घटना से भगवान राम के श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा था कि घटना से सभी लोग दुखी और शर्मिंदा हैं तथा जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि मंदिर में होने वाले चढ़ावे के संग्रह और प्रक्रिया से उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और सभी ऑडिट रिपोर्ट सुरक्षित हैं।

राजनीतिक मुद्दा भी बना मामला

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने की बात कही है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी कथित चढ़ावा चोरी की घटना को “कलंक” बताया था।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल एसआईटी वित्तीय दस्तावेजों, चढ़ावे की व्यवस्था, रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जांच कर रही है। अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी कब, कैसे और किस स्तर पर हुई।

ये भी पढ़ें : 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *