ऑपरेशन CYVAJRA में लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले सात आरोपी गिरफ्तार

ऑपरेशन CYVAJRA में लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले सात आरोपी गिरफ्तार
ऑपरेशन CYVAJRA में लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले सात आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन CYVAJRA’ के तहत राजधानी लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच और साइबर थाना पुलिस के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है।

पुलिस ने सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र स्थित ओमेक्स आर02 रेजिडेंशियल अपार्टमेंट में संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी कर रहा था।

यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन, संयुक्त पुलिस आयुक्त अपर्णा कुमार के पर्यवेक्षण, पुलिस उपायुक्त अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन तथा अपर पुलिस उपायुक्त किरन यादव के नेतृत्व में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर सेल शाहिदा नसरीन, साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने की।

लोकल इनपुट पर हुई छापेमारी

17 जुलाई 2026 को स्थानीय सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ओमेक्स आर02 अपार्टमेंट में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए। इस संबंध में साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट लखनऊ में मु0अ0सं0 81/2026 के तहत बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट बनकर फंसाते थे विदेशी नागरिकों को

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह आधुनिक VoIP कॉलिंग सिस्टम, विशेष कॉलिंग सॉफ्टवेयर, हाईस्पीड इंटरनेट, लैपटॉप, आईफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए काम करता था। आरोपी पहले विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों का डेटा जुटाते थे। इसके बाद उनके लैपटॉप या कंप्यूटर में मैलवेयर या वायरस भेजकर फर्जी पॉपअप तैयार किया जाता था, जिसमें एक टोलफ्री नंबर दिया जाता था।

जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता था तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट या साइबर सिक्योरिटी प्रतिनिधि बताकर बातचीत करते थे। इसके बाद पीड़ित को बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट या सोशल सिक्योरिटी नंबर से जुड़ी गंभीर समस्या बताकर डराया जाता था। फिर कॉल को दूसरे व्यक्ति के पास ट्रांसफर किया जाता, जो खुद को Federal Trade Commission का अधिकारी बताकर कानूनी कार्रवाई का भय दिखाता था। पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए आरोपी Identity Theft Report, FTC Letter, Investigation Report और NonDisclosure Agreement जैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर ईमेल के जरिए भेजते थे।

गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी से वसूलते थे रकम

पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर में अलगअलग टीम बनाई गई थी। डायलर टीम पहले पीड़ित से संपर्क कर उसका विश्वास जीतती थी। इसके बाद टीम व्यूअर और अल्ट्रा व्यूअर जैसे सॉफ्टवेयर की मदद से पीड़ित के कंप्यूटर का एक्सेस लेकर उसकी वित्तीय जानकारी हासिल की जाती थी।

इसके बाद पीड़ितों से वॉलमार्ट और अमेजन के गिफ्ट कार्ड खरीदवाए जाते थे। बड़ी रकम वाले मामलों में अमेरिका के तय पते पर कैश या सोना भी मंगवाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बैंक खातों के बजाय गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम हासिल करता था, ताकि वित्तीय लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो सके।

देशभर से की जाती थी भर्ती

पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से ऐसे युवाओं की भर्ती करता था, जिन्हें बीपीओ में काम करने का अनुभव था और जो धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल सकते थे। कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी गिरोह की ओर से कराई जाती थी, लेकिन किसी को नियुक्ति पत्र या कानूनी अनुबंध नहीं दिया जाता था।

डिजिटल साक्ष्य और उपकरण बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आठ लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, नौ हेडफोन, चार वाईफाई राउटर, पांच लैपटॉप चार्जर, दो कंप्यूटर माउस समेत अन्य उपकरण बरामद किए। इसके अलावा इंटरनेट कॉलिंग सॉफ्टवेयर, Eyebeam Dialer, विदेशी नागरिकों का डेटा, कॉलिंग स्क्रिप्ट, ईमेल टेम्पलेट, नकली कोर्ट ऑर्डर, फर्जी सरकारी दस्तावेज और साइबर अपराध से जुड़ी अन्य डिजिटल सामग्री भी मिली है।

नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस

पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों का विशेषज्ञों से विश्लेषण कराया जा रहा है। जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, तकनीकी सहयोगियों, वित्तीय लाभार्थियों, सर्वर और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि कमिश्नरेट लखनऊ साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रहा है और भविष्य में भी ऐसे संगठित साइबर गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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