दो बहनों की हाथों की रेखाएं और आंखें एक जैसी… बायोमेट्रिक मशीन फेल, नहीं बन सका आधार; कैसे मिली पहचान?​

दो बहनों की हाथों की रेखाएं और आंखें एक जैसी… बायोमेट्रिक मशीन फेल, नहीं बन सका आधार; कैसे मिली पहचान?​

Rampur Twin Sisters Aadhaar Identity: उत्तर प्रदेश के रामपुर शहर में जुड़वा बहनों की आंखों के आगे बायोमीट्रिक प्रणाली फेल हो गई, लेकिन योगी सरकार की संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था में जनसमस्याओं के समाधान के साथ मानवीय सरोकारों को दी जा रही प्राथमिकता की वजह से जुड़वा बहनों को जिला प्रशासन की पहल पर अपनी अलगअलग पहचान मिली. जुड़वा बहनें पिछले कई वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रही थीं.

जुबैर इलियास मोहल्ला खारी कुआं के रहने वाले हैं. उनकी दो बेटिया हैं, जिनका नाम तुुबा और खिजरा है. जुबैर इलियास ने तुबा का तो आधारकार्ड बनवा लिया, लेकिन जब खिजरा का आधार कार्ड बनवाने का नंबर आया तो आंखों और अंगूठे का निशान स्कैन करते समय प्रक्रिया अटक गई.

परिवार कई वर्षों से परेशान था

आधारकार्ड बनाने वाले सेंटर के संचालक ने जुबैर को जानकारी दी कि स्कैनिंग मशीन खिजर की रेटिना और फिंगरप्रिंट के पैटर्न को सेम बताकर प्रक्रिया रोक दे रही है. समस्या का समाधान न होने से परिवार कई वर्षों से परेशान था. दूसरी बेटी का पहचान पत्र नहीं बनने से उसके स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ीजरूरतों को लेकर जुबैर इलियास चिंता में पड़े थे.

तीन माह तक खिजरा को पहचान दिलाने का प्रयास रहा जारी

ऐसे में अपनी समस्या लेकर जुबैर इलियास रामपुर जिला प्रशासन के जनता दर्शन में गए. वहां डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि योगी सरकार जनता के प्रति कितनी संवेदनशील है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। डीएम ने दिल्ली स्थित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण मुख्यालय में संपर्क साधा. तीन माह तक खिजरा को पहचान दिलाने का प्रयास जारी रहा और आखिरकार खिजरा को भी उसकी पहचान मिल गई.

योगी सरकार की जनता के प्रति सवेंदनशीलता के कारण ही फिंगरप्रिंट व रेटिना की बायोमेट्रिक समानता के बावजूद दोनों जुड़वा बहनों को उनकी अलग पहचान दे दी गई. वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहे परिवार के लिए इसको बड़ी राहत के तौर पर देखा जा सकता है.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *