अपने लिए जिए तो क्या जिए… रिटायर जज दंपत्ति ने देहदान के साथ ही देश के नाम की अपनी जमापूंजी​​​

अपने लिए जिए तो क्या जिए… रिटायर जज दंपत्ति ने देहदान के साथ ही देश के नाम की अपनी जमापूंजी​​​
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जज दंपत्ति ने राष्ट्र के नाम की जमा पूंजी

जब तक नौकरी रही, लोगों को न्याय देने की कोशिश की. अब रिटायर हुए तो पहले देह दान किया, फिर पूरा जीपीएफ उठाकर प्रधानमंत्री राहत कोष में डाल दिया. फिर कहा कि इतना करने के बाद भी ऐसा नहीं लग रहा कि समाज के लिए कुछ किया है. यह कहानी मध्य प्रदेश में एक रिटायर्ड जज दंपत्ति न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह और उनकी पत्नी सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंदिरा सिंह की है.

दोनों 1990 बैच के न्यायिक अधिकारी रहे हैं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह ने साल 1994 में अपने ही बैच की न्यायिक अधिकारी इंदिरा सिंह के साथ शदी की और करीब 3 दशक की इस यात्रा के बाद दोनों ने देहदान का फैसला लिया है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कहा कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मेडिकल शिक्षा और समाज के काम आएगा. यही नहीं, दोनों राष्ट्र और समाज के हित में अपने जीवन भर की जमा पूंजी का एक बड़ा हिस्सा दान कर दिया है.

प्रधानमंत्री राहत कोष में डाली रकम

रिटायर्ड जज अवनींद्र कुमार सिंह ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि अपने लिए जिया तो किया जिया. इसलिए वह अपने जीपीएफ की पूरी राशि करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपये प्रधानमंत्री सहायता कोष में दान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस समाज और राष्ट्र ने बहुत कुछ दिया है. अब वह अपनी क्षमता के अनुसार इस समाज और राष्ट्र को कुछ लौटाना चाहते हैं. इतना करके भी उन्हें नहीं लगा रहा कि उन्होंने कोई विशेष काम किया है.

यहां डोनेट किया शरीर

उन्होंने बताया कि देहदान की इच्छा काफी समय से थी. वह चाहते थे कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर समाज के काम आए. इसी सोच के तहत उन्होंने पत्नी के साथ जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में जाकर देहदान की कागजी कार्यवाही पूरी कर ली है. उन्होंने बताया कि आजकल ‘लिविंग विल’ को लेकर भी चर्चा होती है. जीवनकाल में यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्थिति में न हो, तो वह किसी अपने को अधिकृत कर सकता है. इसी भावना से उन्हें लगा कि जीवन के बाद भी शरीर को समाज के काम आने के लिए दिया जा सकता है.

ऐसे हुई दोनों की शादी

इंदिरा सिंह ने बताया कि दोनों वर्ष 1990 बैच के न्यायिक अफसर थे. वह जबलपुर की ही रहने वाली हैं और उनका जन्म तथा शिक्षा-दीक्षा भी जबलपुर में हुई. उनकी शुरुआती पोस्टिंग भी जबलपुर में हुई थी. जबकि उनके पति अवनींद्र कुमार सिंह भोपाल के रहने वाले हैं. उनकी पोस्टिंग भोपाल में थी, लेकिन ट्रेनिंग पहले होशंगाबाद और फिर भोपाल में हुई. वरिष्ठ जजों ने दोनों को एक-दूसरे से परिचय कराया और वर्ष 1994 में दोनों का विवाह हुआ.

साथ साथ रही पोस्टिंग

इंदिरा सिंह के मुताबिक विवाह के बाद एक-दो जगह को छोड़कर दोनों की पोस्टिंग भी साथ-साथ होती रही. उन्होंने जनवरी 2022 में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्ति ली. वहीं अवनींद्र कुमार सिंह 1 मई 2023 को उच्च न्यायालय में पदस्थ हुए और 17 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए. अब न्यायिक सेवा की इस लंबी यात्रा के बाद दोनों ने एक साथ देहदान का फैसला लिया है.

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