
संयुक्त राष्ट्र। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि रूस उनके देश के खिलाफ युद्ध में भारत और 40 से अधिक अन्य देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है तथा उन्होंने इन देशों से अपील की कि वे उन्हें ”इस युद्ध में घसीटने” से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रोकें। जेलेंस्की ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए कहा, ”और अभी मैं यूरोप से बात नहीं करना चाहता। मैं उन देशों से बात करना चाहता हूं, जिनके लोगों का रूस एक और बेहद क्रूर अभियान में इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है।”
भारत समेत इन देशों के नागरिकों का हो रहा इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि यूक्रेन को युद्धबंदियों के रूप में कई देशों के नागरिक मिलते हैं और ये केवल उत्तर कोरिया के नागरिक नहीं हैं। जेलेंस्की ने कहा, ”हम जानते हैं कि रूस अपने युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। इस युद्ध में घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, भारत, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान, दक्षिण अफ्रीका और कई अन्य देश शामिल हैं। और समयसमय पर हमें कुछ युद्धबंदियों को उनके देश वापस भेजने के अनुरोध मिलते हैं।” उन्होंने कहा कि यूक्रेन को पता है कि युद्ध में लड़ रहे अन्य देशों के नागरिक भी युद्ध के मैदान में मारे जा रहे हैं।
रूस के छल कपट का शिकार हो रहे मासूम लोग
जेलेंस्की ने कहा, ”हम युद्ध के मैदान में ऐसे लोगों को भी मरते हुए देखते हैं, जो रूसी नहीं हैं, जो आपके देशों के लोग हैं, 47 देशों के लोग हैं और जो छलकपट तथा चालों के जरिए रूस पहुंच गए।” उन्होंने इन 47 देशों के प्रत्येक प्रतिनिधि से सीधे अपील करते हुए कहा, ”आप जानते हैं कि रूस आपके लोगों, आपके नागरिकों के साथ क्या कर रहा है। उनका ध्यान रखें और उन्हें किसी दूसरे मोर्चे पर जाने से रोकें। पुतिन को आपको इस युद्ध में घसीटने न दें। रूस को अपनी समस्याओं से निकलने, अपनी शर्म छिपाने और अपने पागलपन की कीमत आपके लोगों की जान से चुकाने न दें। उसके कार्रवाई करने की गुंजाइश सीमित करें। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उसके धन के स्रोत सीमित करें। उसके युद्ध को सीमित करें।”
रूसी सेना में भर्ती को लेकर भारत की चिंता
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच ”विभिन्न स्तरों पर कई मौकों पर” उठाया गया है। मिस्री ने कहा था, ”पिछली बार तक हमारे पास 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी, जिन्हें रूसी सेना में भर्ती किया गया था।” उन्होंने कहा था, ”इनमें से 139 भारतीय नागरिकों को सेना से मुक्त किए जाने की जानकारी हमें मिली है। और दुर्भाग्य से, हमारे पास अब तक 51 लोगों के मारे जाने की भी जानकारी है।
क्या है भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मामला
भारत और रूस के बीच भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में लगातार उठता रहा है। भारत सरकार के अनुसार, कुछ भारतीय नागरिकों को ऐसी परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया, जिनमें उन्हें रोजगार के नाम पर रूस ले जाने या उनकी भूमिका के बारे में पूरी जानकारी न होने की शिकायतें सामने आईं। अगस्त 2024 में विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में कहा था कि सरकार को कुछ भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई के लिए अनुरोध मिले हैं, जिन्हें कथित तौर पर रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नागरिकों की भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच विभिन्न स्तरों पर कई मौकों पर उठाया गया है। भारत का मुख्य प्रयास ऐसे भारतीय नागरिकों को रूसी सैन्य सेवा से मुक्त कराकर सुरक्षित भारत वापस लाना रहा है। जुलाई 2026 में विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक 139 भारतीय नागरिकों की रिहाई भारत के प्रयासों से हुई थी, जबकि करीब दो दर्जन भारतीय उस समय भी रूसी सेना में होने की सूचना थी।
नौकरी के नाम पर कई भारतीयों को रूस ले जाने की शिकायतें
मामले में यह भी सामने आया है कि कुछ भारतीय नागरिकों को रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर भर्ती एजेंटों या अन्य माध्यमों से भेजा गया और बाद में उन्हें रूसी सैन्य व्यवस्था से जुड़ी भूमिकाओं में पाया गया। इसलिए भारत सरकार ने नागरिकों को जोखिम वाली विदेशी नौकरी की पेशकशों से सावधान रहने की सलाह दी है। हालांकि, सभी मामलों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भी ऐसे नागरिकों को लेकर भाषा इस्तेमाल की गई है कि वे कथित तौर पर या अस्पष्ट परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुए थे। इसलिए प्रत्येक मामले के तथ्यों को अलगअलग देखना जरूरी है।
अगस्त 2024 में नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने कहा था कि संबंधित भारतीय नागरिकों ने रूसी सैन्य सेवा के लिए स्वैच्छिक अनुबंध किए थे। रूसी पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां भारतीय नागरिकों की पहचान और उन्हें सेवा से मुक्त कराने के लिए समन्वय कर रही हैं। रूस ने यह भी स्पष्ट किया था कि अप्रैल 2024 से उसने भारत समेत कुछ विदेशी देशों के नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती करना बंद कर दिया था। रूसी दूतावास के अनुसार, रूसी सरकार ने भारतीयों की भर्ती के लिए किसी तरह का सार्वजनिक या गुप्त फर्जी भर्ती अभियान नहीं चलाया।
भारत और रूस के दावों में मुख्य अंतर
इस मामले में दोनों देशों की शुरुआती व्याख्याओं में अंतर रहा है, रूस की ओर से कहा गया कि कई भारतीयों ने सैन्य सेवा के लिए अनुबंध किया था और संबंधित प्रक्रियाएं संविदात्मक आधार पर हुईं। वहीं, इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ भारतीयों को कथित तौर पर दूसरी नौकरियों के नाम पर रूस ले जाया गया और बाद में रूसी सैन्य व्यवस्था से जोड़ दिया गया। भारत ने उनकी जल्द रिहाई और वापसी की मांग की। अब दोनों पक्षों में भारतीय नागरिकों की पहचान, रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए दोनों सरकारों के बीच संपर्क जारी रहा है। रूस ने मृत भारतीयों के परिवारों के मुआवजे की बात भी कही थी। रूसी दूतावास ने 2024 में भारतीय नागरिकों के सैन्य सेवा के दौरान मारे जाने के मामलों पर संवेदना व्यक्त की थी। उसने कहा था कि संबंधित अनुबंधों के तहत देय मुआवजे और अन्य संविदात्मक दायित्वों को पूरा किया जाएगा।
रूस का ताजा रुख
सितंबर 2026 में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत ने यह मुद्दा कई बार उठाया है और रूस उन भारतीय नागरिकों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में है जो अभी रूसी सेना के साथ युद्धक्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पहचान होने के बाद उन्हें वापस भेजने का काम किया जाएगा। इसी अवधि में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 227 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती हुए थे; इनमें से 139 को सेवा से मुक्त किया जा चुका था और 51 की मृत्यु की जानकारी थी। मंत्रालय ने कहा कि शेष मामलों को लेकर रूस के साथ लगातार बातचीत चल रही।
कितने भारतीय प्रभावित हुए?
अगस्त 2024 में विदेश मंत्रालय ने संसद में बताया था कि उसे रूसी सशस्त्र बलों में कथित रूप से भर्ती भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई के अनुरोध मिले हैं। उसी महीने मंत्रालय की एक ब्रीफिंग में 69 भारतीयों का उल्लेख किया गया था जो रूसी सेना से वापस आना चाहते थे। जुलाई 2026 के विदेश मंत्रालय के अपडेट में 139 भारतीयों की रिहाई और लगभग दो दर्जन भारतीयों के अभी भी रूसी सेना में होने की जानकारी दी गई।