
यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात हुए स्लीपर बस हादसे ने उरई के एक परिवार को ऐसा जख्म दिया, जिसे वह शायद ही कभी भूल पाएगा। शहर के राजेंद्र नगर निवासी हरिशरण गुप्ता (55) बीमार बेटे ओम को नोएडा से घर लाने के लिए मंगलवार को गए थे।
बुधवार रात बेटे के साथ स्लीपर बस से उरई लौट रहे थे। रास्ते में बस आग की लपटों में घिर गई। जान बचाने की जद्दोजहद के बीच हरिशरण ने अपने बेटे ओम को खिड़की से बाहर कुदाकर उसकी जान बचा ली, लेकिन खुद बाहर नहीं निकल सके और आग की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई।
हरिशरण गुप्ता शहर के राजेंद्र नगर में परिवार के साथ रहते थे और एकाउंटेंट का काम करते थे। उनका बेटा ओम गुप्ता इस समय अपनी बहन राधिका के साथ नोएडा में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।
तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर हरिशरण मंगलवार को बेटे को लेने नोएडा गए थे। बुधवार रात करीब नौ बजे वह ओम के साथ राठ से उरई आने वाली स्लीपर बस में सवार हुए थे।