
लखनऊ। देशभर में कृषि की पढ़ाई और रिसर्च कर रहे छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी डिजिटल पहल शुरू की है। कृषि छात्रों को स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि के लिए अब लंबे इंतजार और दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा परिसर से NSPDBT सिस्टम की औपचारिक शुरुआत की। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत सरकार ने पहली किस्त के रूप में 21.35 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इससे देशभर के 6000 से अधिक कृषि छात्रों को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की बात कही गई है।
सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी स्कॉलरशिप
NSP यानी नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से जोड़ दिया गया है। इसके बाद स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि सीधे लाभार्थी छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत आर्थिक सहायता हर महीने छात्रों के खातों में भेजे जाने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि ऑनलाइन और ऑटोमेटेड सिस्टम से कागजी प्रक्रिया में होने वाली देरी कम होगी और छात्रों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
6000 से ज्यादा छात्रों को मिलेगा फायदा
इस पहल से देशभर के 6000 से अधिक कृषि छात्रों को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर पोस्टग्रेजुएट छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए समय पर फेलोशिप मिलने से पढ़ाई, प्रयोग और रिसर्च से जुड़े खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से छात्रों को अपनी पढ़ाई और शोध कार्य पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
कृषि मंत्री बोले छात्रों का मनोबल बना रहना जरूरी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पढ़ाई, एडमिशन और आर्थिक मदद से जुड़ी व्यवस्थाएं तय समय पर पूरी होनी चाहिए, ताकि छात्रों का मनोबल बना रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा और रिसर्च को मजबूत करने में आर्थिक सहायता की भूमिका पर भी जोर दिया। मंत्री के मुताबिक, स्कॉलरशिप केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं है, बल्कि कृषि शिक्षा और युवाओं को बेहतर अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खेतों में जाकर सीखेंगे कृषि छात्र
इस मौके पर कृषि शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर भी जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि एग्रीकल्चर की पढ़ाई केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। छात्रों को खेतों में जाकर खेती की वास्तविक परिस्थितियों, मिट्टी की स्थिति और किसानों की समस्याओं को समझना होगा। छात्रों को फील्ड एक्सपीरियंस और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देने पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे ऐसी तकनीक और समाधान विकसित कर सकें, जिनका वास्तविक लाभ किसानों को मिल सके।
कृषि रिसर्च और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
सरकार की इस पहल से कृषि क्षेत्र में शोध कर रहे युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। समय पर फेलोशिप मिलने से रिसर्च स्कॉलर्स को लैब एक्सपेरिमेंट और फील्ड ट्रायल जैसे कामों पर बेहतर तरीके से ध्यान देने में मदद मिलेगी। कृषि मंत्री ने हरियाली अमावस्या के मौके पर ICAR के संस्थानों में पौधारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील भी की।