
बाराबंकी। घाघरा नदी का रौद्र रूप अब तटवर्ती गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटान के कारण पूरेडलई क्षेत्र के कई गांवों में खतरा बढ़ गया है। नदी के तेज बहाव से जमीन लगातार कट रही है, जिससे ग्रामीणों के आशियाने उजड़ने लगे हैं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सबसे दर्दनाक घटना गुनौली गांव में सामने आई, जहां रविवार देर रात निर्मला पत्नी सोमई का प्रधानमंत्री आवास घाघरा नदी की तेज धारा में समा गया। देखते ही देखते पूरा मकान नदी में विलीन हो गया और परिवार के सिर से छत छिन गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। वहीं, गोमती पुत्र मिश्रीलाल का मकान भी कटान की चपेट में आ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, मकान कभी भी नदी में समा सकता है।
कई गांवों में कटान का संकट
घाघरा नदी की कटान से तेमा, गुनौली, कोयलावर और जलालपुर टिकरी समेत कई गांव प्रभावित हैं। नेपाल के बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे कटान की रफ्तार और तेज हो गई है। हालात यह हैं कि ग्रामीण रातभर जागकर अपने घरों और सामान की सुरक्षा में जुटे हुए हैं। लोगों में नदी के बढ़ते खतरे को लेकर डर का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी, नावों की व्यवस्था
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार शशांक नाथ उपाध्याय और नायब तहसीलदार सुधाकर पांडे लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए नावों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ पीड़ितों से वसूली की शिकायत पर कार्रवाई
इधर, ग्रामीणों ने नाविकों पर बाढ़ पीड़ितों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया। शिकायत मिलने पर नायब तहसीलदार सुधाकर पांडे मौके पर पहुंचे और घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने नाविकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों से किसी भी तरह की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने की अपील की है। घाघरा नदी का बढ़ता जलस्तर तटवर्ती गांवों के लिए लगातार चिंता का कारण बना हुआ है।
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