
अमृत विचार : बरेली कॉलेज के एमएड सभागार में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका पर संगोष्ठी हुई। इसमें भारतपाकिस्तान विभाजन के दौरान लोगों को मिले जख्मों और उसके सामाजिक प्रभावों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन नई पीढ़ी को इतिहास से सीख लेकर देश के भविष्य की ओर देखना चाहिए।
मुख्य अतिथि अमृत विचार के सीओओ पार्थो कुनार ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता। हालांकि पीछे उतना ही देखने की जरूरत है, जितना वर्तमान और भविष्य को समझने में मदद मिले। हमें भविष्य की ओर देखने और देश के विकास में योगदान देने की जरूरत है।
एकताअखंडता बनाए रखें
बरेली कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने कहा कि कोई भी घटना एक दिन में नहीं घटती। उसके पीछे इतिहास की अनेक घटनाएं और परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने बंगाल विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया था, लेकिन बंगभंग आंदोलन ने उनके इरादों को सफल नहीं होने दिया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।
सवाल उठाया कि 1947 के विभाजन को रोकने के लिए वैसा व्यापक आंदोलन क्यों नहीं हो सका। उन्होंने युवाओं से देश की एकता और अखंडता के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध रखने का आह्वान किया।
इतिहास से सबक की जरूरत
विशिष्ट अतिथि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एमएड विभाग के प्रोफेसर डॉ. विमल यादव ने कहा कि विभाजन जैसी घटनाएं अचानक नहीं होतीं। इसके लिए लंबे समय तक लोगों के बीच वैमनस्य और विभाजन की भावना पैदा की जाती है। उन्होंने इतिहास से सबक लेने की जरूरत जताई।
बड़ा दर्द झेला
दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एसी त्रिपाठी ने कहा कि धर्म के नाम पर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया ने इतिहास में दर्द झेला है। धर्म को अध्यात्म की ओर ले जाना ही मानवता के हित में है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विकसित भारत का सपना देख रही है और विश्वास है कि वह देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की सचिव प्रो. नीलम गुप्ता, संयोजिका प्रो. प्रतिभा शर्मा, उप प्राचार्य प्रो. वंदना शर्मा, संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. अजीता सिंह, प्रो. जयश्री मिश्रा समेत शिक्षक और छात्रछात्राएं मौजूद रहे।