
दबतोरी, अमृत विचार। चार जिलों की सीमा से जुड़े दबतोरी क्षेत्र में सड़कों का बुरा हाल है। जगहजगह बने गड्ढों में जलभराव से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव सेंटा खेड़ा के पास मुख्य मार्ग पर तो तालाब बन गया है जिसके चलते लोग खेतों या मेड़ से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार नियंत्रण खो देने पर पानी में गिर जाते हैं। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है ऐसे में सावन में कांवड़ियों को खासा परेशानी का सामना करना होगा।
तहसील बिसौली क्षेत्र का सीमावर्ती गांव दबतोरी चार जिलों संभल, मुरादाबाद, रामपुर और बरेली की सीमा से जुड़ा है। यहां लंबे समय से क्षेत्र की सड़कें टूटी और गहरे गड्ढों में तब्दील होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लक्ष्मीपुर से आसफपुर को जाने वाला मार्ग गांव सेटा खेड़ा के रेलवे अंडरपास के पास तालाब जैसा बन गया है। खेत और सड़क के गड्ढों में भरे पानी से खेत कहां तक है पता ही नहीं चलता। इस रास्ते से गुजरने वाले लोग रेल की पटरी से जान जोखिम डालकर मजबूरन गुजर रहे हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर खेतों की मेड़ पर होकर भी लोग आनाजाना कर रहे हैं। गुरुवार को एक महिला अपने छोटे बच्चे को लेकर पगडंडियों से गुजरते समय पर पैर फिसलने से गिर गई और दोनों चोटिल हो गए।
वहीं दबतोरी से आसफपुर और लक्ष्मीपुर से हरदासपुर मार्ग लंबे समय से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुका है। दबतोरीसिरौली मुख्य मार्ग के अलावा मुसिया गनला, भरतपुर मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गया है। जबकि इन्हीं मार्गों से आसपास के जिलों के लोग बदायूं आतेजाते रहते हैं। ग्रामीण बिसौली में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत करके सड़कों की मरम्मत की मांग कर चुके हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क बनवाना तो दूर गड्ढों को भरवाना भी उचित नहीं समझा। कुछ दिन बाद कांवड़ यात्रा शुरू होगी। हरिद्वार या कछला से गंगा जल लाने वाले कांवड़िया इसी मार्ग से गुजरेंगे। लेकिन इस बार उन्हें गहरे गड्ढों और उखड़े हुए मार्गों से होते हुए जलाभिषेक के लिए जाना पड़ेगा।