
बदायूं, अमृत विचार। केजीएमयू लखनऊ से हेपेटाइटिस की जांच को भेजे गए सैंपल वापस कर देने के बाद जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जांच के अभाव में मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही है जिससे मरीजों की स्थिति बिगड़ने लगी है। जिला अस्पताल प्रशासन ने दूसरी बार लखनऊ को पत्र लिख कर सैंपलों की जांच कराए जाने की मांग की है।
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों को देखा जाता है। मरीजों को एक तिथि पर एकत्र कर उनके ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। यह ब्लड सैंपल जांच को लखनऊ स्थित किंग जार्च मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजे जाते हैं वहां से 25 दिन में जांच रिपोर्ट आती है। जिसके बाद ही मरीज को दवा दी जाती है। जिला अस्पताल के अनुसार 18 अप्रैल को लखनऊ के केजीएमयू से पत्र भेजा गया था जिसमें स्पष्ट कहा गया कि यहां पर ब्लड सैंपल न भेजे जाएं। जांच किट नहीं हैं। पत्र जिला अस्पताल में आने के बाद जिम्मेदारों ने फिर बात की जिसके बाद केजीएमयू ने वही जवाब दिया। अब हेपेटाइटिस की जांच के लिए ब्लड सैंपल लखनऊ नहीं भेजे जा रहे हैं। जिससे मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। स्थानीय स्तर पर राजकीय मेडिकल कालेज में हेपेटाइटिस के सैंपलों की जांच की जाती थी। वहां पर भी दो महीने से जांच मशीन खराब है इसलिए वहां भी सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। अब जिला अस्पताल में पुराने मरीजों को दवा दी जा रही है जबकि नए मरीजों को जांच के अभाव में दवा नहीं दी जा रही है। हर दिन दर्जनों नए मरीज वापस लौट रहे हैं। जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह मामला हमारे स्तर का नहीं है।
जिला अस्पताल में वरिष्ठ फिजीशियन डाॅ. एसएम कमल ने शुक्रवार को बताया कि हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां पर कोई व्यवस्था नहीं है। जो मरीज पुराने हैं उन्हें ही दवा दी जा रही है। नए मरीजों को बाहर से जांच कराने की सलाह दी जा रही है।
निजी पैथोलॉजी पर होती है ढाई हजार में जांच
प्राइवेट पैथोलॉजी लैब से हेपेटाइटिस की जांच कराने पर करीब ढाई हजार रुपये का खर्च आता है। जिससे गांव देहात के मरीज प्राइवेट जांच नहीं करा पाते हैं। जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में निशुल्क जांच की जाती है जिससे यहां पर करीब सात हजार से अधिक हेपेटाइटिस के मरीजों को दवा दी जा रही है। इनमें से अधिकांश मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जिनकी दवा बंद कर दी गई है। मौसम के बदलते मिजाज से नए मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
हेपेटाइटिस के मरीजों का वायरल लोड न हो पाने की समस्या से सीएमओ, एडी हेल्थ बरेली, निदेशक संचारी रोग लखनऊ को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। लखनऊ में शासन से बजट नहीं मिल पाने के कारण जांच नहीं की जा रही है। बड़ी संख्या में वहां सैंपल पहुंच रहे हैं जिससे लखनऊ से सैंपल वापस किए गए हैं। अब नए सिरे से पत्राचार किया जा रहा है। संभवत अगले महीने तक समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। डाॅ. मो. तहसीन, नेशनल वायरल हेपेटाइटिस प्रभारी।